परमवीर चक्र से अलंकृत अमर शहीद मेजर सोमनाथ शर्मा जी की जयंती पर परमार्थ निकेतन से भावभीनी श्रद्धाजंलि

  • अमर शहीद मेजर सोमनाथ शर्मा जी की राष्ट्रभक्ति को नमन

ऋषिकेश। माँ भारती के वीर सपूत, अदम्य साहस, अद्वितीय शौर्य और सर्वाेच्च राष्ट्रभक्ति के प्रतीक, परमवीर चक्र से अलंकृत अमर शहीद मेजर सोमनाथ शर्मा जी की जयंती पर परमार्थ निकेतन से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उनका जीवन केवल एक सैनिक की कहानी नहीं, बल्कि कर्तव्य, त्याग, समर्पण और राष्ट्रप्रेम का वह दिव्य आदर्श है, जिसने भारतीय सैन्य इतिहास में स्वर्णिम अध्याय अंकित किया।
मेजर सोमनाथ शर्मा जी सन 1947-48 के भारत-पाक युद्ध के दौरान कश्मीर की धरती पर जब शत्रु सेना ने आक्रमण किया, तब मेजर सोमनाथ शर्मा जी ने अद्वितीय वीरता का परिचय दिया। श्रीनगर एयरफील्ड की सुरक्षा का दायित्व उनके कंधों पर था। विषम परिस्थितियों, सीमित संसाधनों और भारी शत्रु बल के बावजूद उन्होंने पीछे हटना स्वीकार नहीं किया। घायल होने के बाद भी वे अपने साथियों का उत्साह बढ़ाते रहे और अंतिम सांस तक मोर्चे पर डटे रहे। उनका वह अमर वाक्य “मैं एक इंच भी पीछे नहीं हटूँगा” आज भी हर सैनिक के हृदय में अग्निशिखा की तरह प्रज्वलित है।
उनकी वीरता और नेतृत्व क्षमता तथा भारतीय सेना अद्वितिय साहस से विजय प्राप्त की। उनका बलिदान केवल एक युद्ध की जीत नहीं, बल्कि भारत की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा का निर्णायक क्षण था।
स्वामी जी ने कहा कि स्वतंत्रता हमें यूँ ही नहीं मिली है। यह आज़ादी असंख्य वीरों के रक्त, तप, त्याग और बलिदान से सिंचित हुई है। भारत की मिट्टी का कण-कण शहीदों की शौर्यगाथा सुनाता है, हर तिरंगा हमें उन अमर बलिदानों की याद दिलाता है जिन्होंने हँसते-हँसते अपने प्राण मातृभूमि पर न्योछावर कर दिए। यदि हम आज निर्भय होकर सांस ले पा रहे हैं, अपने सपनों को जी पा रहे हैं, तो उसके पीछे किसी सैनिक की जागती हुई रातें, किसी माँ की भीगी हुई आँखें और किसी परिवार का अधूरा जीवन छिपा है।
उन्होंने दृढ़ स्वर में कहा कि भारतीय सेना वेतन के लिये नहीं वतन के लिये जीती है। जब सीमा पर गोलियाँ चलती हैं, तब सैनिक लाभ-हानि नहीं सोचते केवल तिरंगे की आन-बान-शान की रक्षा करता है। हिमालय की बर्फ हो या रेगिस्तान की तपती रेत, हमारे जवान हर परिस्थिति में अडिग खड़े रहते हैं।
आज की परमार्थ गंगा आरती सेना के वीर जवानों को समर्पित की।

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