देसंविवि में आयोजित अंतरराष्ट्रीय समिट में एआई की नैतिकता पर विशेषज्ञों ने रखे विचार

  • विवेक और नैतिकता के बिना एआई विनाशकारी हो सकता है : डॉ चिन्मय पण्ड्या
  • भ्रांतियाँ दूर हो जाएँ तो विश्व में शांति स्वत: स्थापित हो सकती है : डॉ फादी दाऊ

हरिद्वार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय, शांतिकुंज एवं इंडिया एआई मिशन (भारत सरकार) के संयुक्त तत्त्वावधान में देसंविवि के मृत्युंजय सभागार में एआई फॉर संस्कृति विषय पर अंतरराष्ट्रीय समिट का आयोजन हुआ।
समिट के अध्यक्ष देवसंस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि आधुनिक तकनीक और भारतीय संस्कृति का संगम भविष्य की सुरक्षा का मार्ग है। साउथ एशियन इंस्टीट्यूट फॉर पीस एंड रिकॉन्सिलिएशन (एसएआईपीआर) के अध्यक्ष डॉ पण्ड्या ने कहा कि ऋषियों और पूर्वजों द्वारा संरक्षित संस्कृति को एआई के माध्यम से वैश्विक स्तर पर सुरक्षित और प्रसारित करना आज का युग धर्म है। प्रतिकुलपति डॉ. पण्ड्या ने जोर दिया कि एआई तकनीकी विश्वास, सत्य और पारदर्शिता के नैतिक स्तंभों पर आधारित होनी चाहिए। विवेक और नैतिकता के बिना एआई विनाशकारी हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारतीय अध्यात्म और गायत्री परिवार के मूल मंत्र एकता, ममता, शुचिता और समता इस तकनीकी को कल्याणकारी दिशा में मोड़ सकते हैं। उन्होंने आह्वान किया कि मानवता के इस कठिन दौर में भारतीय अध्यात्म ही वह प्रकाश स्तंभ है, जो तकनीक को विनाश से हटाकर विकास और शांति की ओर मोड़ सकता है।


समिट के मुख्य अतिथि ग्लोबलेथिक्स के कार्यकारी निदेशक डॉ फादी दाऊ ने कहा कि संस्कृतियों की विविधता ही मानवता का वास्तविक सौंदर्य है और यदि आपसी भ्रांतियाँ दूर हो जाएँ तो विश्व में शांति स्वत: स्थापित हो सकती है। एआई के संदर्भ में उन्होंने जोर दिया कि तकनीकी का उद्देश्य मानवता और लोकतांत्रिक मूल्यों की सेवा होना चाहिए तथा नैतिक एआई के लिए वैश्विक सहयोग आवश्यक है। उन्होंने अखिल विश्व गायत्री परिवार के ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ मिशन को प्रेरणादायक बताते हुए शांतिकुंज और देव संस्कृति विश्वविद्यालय के परिवेश को मानवता के उत्थान हेतु आदर्श और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण बताया। विशिष्ट अतिथि इरोज इंटरनेशनल की सीईओ डॉ शिल्पा देसाई ने कहा कि जब विश्व केवल एआई की चर्चा कर रहा है, तब देव संस्कृति विश्वविद्यालय भारतीय संस्कृति और अध्यात्म को तकनीक से जोडक़र मानवता का मार्गदर्शन कर रहा है। उन्होंने पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य के कथन को उद्धृत करते हुए विश्वास जताया कि अखिल विश्व गायत्री परिवार विश्वकल्याण के इस संकल्प को साकार कर रहा है।

इस अवसर पर एआई से संबंधित निबंध, डिजिटल पोस्टर, हैकथॉन सहित अनेक विषयों पर आयोजित प्रतियोगिताओं में गायत्री करहैत, यश सारस्वत, प्रखर भदौरिया, अमृता कुमारी, हीरा चुग, हृषिकेश रंजन, ज्ञान प्रकाश, सरोज पोद्दार, अमित तिवारी, ऋषिका गायकवाड़, पूजा कुमारी, प्रोमा कांजीलाल, शांभवी, अमृतांश गुप्ता, संस्कृति अग्रवाल, श्रेष्ठा रावत, प्रिया कुमारी, यादव सिंह, भास्कर, मुकुन्द ठाकुर आदि अव्वल रहे। प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या सहित विवि प्रशासन ने बधाई दी।
समापन से पूर्व डॉ पण्ड्या, डॉ दाऊ एवं डॉ देसाई ने विवि द्वारा सम्पादित विभिन्न पत्रिकाओं का विमोचन किया, तो वहीं प्रतिकुलपति ने अतिथियों को देवसंस्कृति विवि के प्रतीक चिह्न, युगसाहित्य आदि भेंट सम्मानित किया। इस अवसर पर देसंविवि, शांतिकुंज परिवार सहित पत्रकारगण मौजूद रहे।

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