राम नगरी में बनेगा धामी सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट राज्य अतिथि गृह, श्रद्धालुओं को सहूलियत और संस्कृति को मिलेगा राष्ट्रीय मंच

  • सचिव आवास व राज्य संपत्ति डॉ. आर. राजेश कुमार ने लिया अयोध्या अतिथि गृह निर्माण स्थल का किया विस्तृत जायजा, अधिकारियों को गुणवत्ता और समय सीमा पर दिए सख्त निर्देश

अयोध्या/फैजाबाद। देश की धार्मिक राजधानी अयोध्या में उत्तराखंड सरकार ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल शुरू की है। अयोध्या-फैजाबाद हाईवे पर प्रस्तावित राज्य अतिथि गृह अब हकीकत का रूप लेता दिख रहा है। लगभग 54,000 (चव्वन हजार) वर्ग फीट क्षेत्र में बनने वाला यह विशाल परिसर उत्तराखंड से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक भरोसेमंद ठिकाना बनेगा। सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार के स्थल निरीक्षण के बाद परियोजना के क्रियान्वयन ने रफ्तार पकड़ ली है, जिससे साफ है कि सरकार इस योजना को लेकर पूरी गंभीरता से आगे बढ़ रही है। इस महत्वाकांक्षी योजना के पीछे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की स्पष्ट सोच और परिणामोन्मुख कार्यशैली दिखाई देती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धार्मिक पर्यटन को आर्थिक विकास से जोड़ने की जो रणनीति बनाई है, यह परियोजना उसी की एक मजबूत कड़ी है। चारधाम यात्रा को बेहतर प्रबंधन और सुविधाओं से जोड़ने के बाद अब सरकार अन्य प्रमुख तीर्थ स्थलों पर भी उत्तराखंड की पहचान स्थापित करने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि परियोजना गुणवत्ता, आधुनिकता और तय समयसीमा के मानकों पर खरी उतरे। सचिव आवास-राज्य संपित्त जल्द मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर उन्हें विस्तृत कार्ययोजना रिपोर्ट सौंपेंगें। निरीक्षण के दौरान प्रोजेक्ट मैनेजर पेयजल निगम राकेश चन्द्र तिवारी, राज्य संपत्ति विभाग से डॉ विनीता सिंह, वरिष्ठ व्यवस्था अधिकारी मुन्ना सिंह सहित संबधित अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।

रणनीतिक लोकेशन, आसान पहुंच
प्रस्तावित अतिथि गृह की लोकेशन इसकी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभर रही है। श्रीराम मंदिर से करीब 6.60 किलोमीटर और फैजाबाद शहर से 6.40 किलोमीटर की दूरी इसे अत्यंत सुविधाजनक बनाती है। अयोध्या एयरपोर्ट से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी इसे देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए भी सुलभ बनाती है। वहीं लखनऊ, वाराणसी और प्रयागराज जैसे प्रमुख शहरों से सीधा संपर्क इसे धार्मिक पर्यटन का अहम केंद्र बना सकता है। देहरादून और नई दिल्ली से आने वाले यात्रियों के लिए भी यह एक प्रमुख पड़ाव होगा।

आम श्रद्धालुओं को बड़ी राहत
इस परियोजना की खासियत यह है कि इसे केवल वीआईपी सुविधाओं तक सीमित नहीं रखा गया है। आम श्रद्धालुओं के लिए किफायती दरों पर ठहरने की व्यवस्था इस योजना को जन-हितैषी बनाती है। चारधाम यात्रा की तर्ज पर यहां भी उत्तराखंड के श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित आवास मिलेगा। इससे अयोध्या यात्रा के दौरान ठहरने की समस्या काफी हद तक कम होगी और यात्रा अधिक सुगम बनेगी।

सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित होगा परिसर
सरकार की योजना इस अतिथि गृह को केवल ठहरने तक सीमित रखने की नहीं है, बल्कि इसे उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान के केंद्र के रूप में विकसित करने की है। यहां लोक कला, लोक संगीत, पारंपरिक उत्सव और सरस मेले जैसे आयोजन किए जाएंगे। इससे उत्तराखंड की समृद्ध संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर मंच मिलेगा। साथ ही विवाह समारोह और अन्य सामाजिक आयोजनों के लिए भी यह परिसर उपयोगी साबित होगा, जिससे राजस्व के नए अवसर भी बनेंगे।

पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
अयोध्या में तेजी से बढ़ते धार्मिक पर्यटन के बीच यह परियोजना उत्तराखंड के लिए आर्थिक दृष्टि से भी लाभकारी साबित हो सकती है। लाखों श्रद्धालुओं के बीच उत्तराखंड की मौजूदगी इस अतिथि गृह के माध्यम से और मजबूत होगी। यह पहल “धार्मिक पर्यटन” और “संस्कृति कनेक्ट” के मॉडल को आगे बढ़ाते हुए राज्य के पर्यटन उद्योग को अप्रत्यक्ष रूप से नई गति देगी।

गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष जोर
स्थल निरीक्षण के दौरान सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता और समय सीमा का विशेष ध्यान रखा जाए। उन्होंने कहा कि यह परियोजना उत्तराखंड की छवि से जुड़ी है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं है।

ड्रीम प्रोजेक्ट से बनेगा सांस्कृतिक सेतु – डॉ. आर. राजेश कुमार
डॉ. आर. राजेश कुमार के अनुसार अयोध्या में बनने वाला उत्तराखंड राज्य अतिथि गृह मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की दूरदर्शी सोच और प्रभावी कार्ययोजना का सशक्त उदाहरण है। यह परियोजना न केवल श्रद्धालुओं के लिए राहत लेकर आएगी, बल्कि उत्तराखंड को देश के धार्मिक और सांस्कृतिक मानचित्र पर नई मजबूती के साथ स्थापित करेगी। यह अतिथि गृह केवल एक इमारत नहीं बल्कि उत्तराखंड और अयोध्या के बीच सांस्कृतिक सेतु का काम करेगा। यहां श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने के साथ-साथ उत्तराखंड की परंपराओं और संस्कृति को भी राष्ट्रीय पहचान मिलेगी।

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