देव संस्कृति विवि और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की संयुक्त पहल, योग और संगीत चिकित्सा से होगा सर्वाइकल दर्द का निवारण

हरिद्वार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय के योग विज्ञान एवं मानव चेतना विभाग ने आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते सर्वाइकल दर्द की समस्या के निवारण के लिए एक महत्वपूर्ण शोध पहल की है। ‘योग एवं संगीत चिकित्सा के संयुक्त प्रभाव’ पर आधारित इस विशेष अध्ययन का शुभारंभ शांतिकुंज हरिद्वार स्थित शताब्दी चिकित्सालय में समारोह के साथ किया गया।

यह शोध परियोजना वैश्विक स्तर पर चिकित्सा विज्ञान और प्राचीन भारतीय ज्ञान के संगम पर आधारित है। इसे देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा लिमिटलेस ब्रेन लैब, दुबई (युएई) के सयुक्त तत्त्वावधान में किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि इस अध्ययन में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के ‘डिवीज़न ऑफ़ स्लिप मेडिसिन’ की सहभागिता भी शामिल है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक प्रामाणिकता प्रदान करती है।

इसका शुभारम्भ शांतिकुंज महिला मंडल की प्रमुख आदरणीया शेफाली पंड्या के ने किया। इस अवसर पर अस्पताल की प्रभारी डॉ. मंजू चोपदार सहित देव संस्कृति विश्वविद्यालय के शोध छात्र, शिक्षक और चिकित्सा क्षेत्र के कई विशेषज्ञ उपस्थित रहे।

आदरणीया शेफाली पंड्या ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि प्राचीन योग विद्या और संगीत की स्वर लहरियों में असाध्य रोगों को जड़ से मिटाने की अद्भुत शक्ति निहित है। यह शोध न केवल सर्वाइकल रोगियों को शारीरिक कष्ट से मुक्ति दिलाएगा, बल्कि मानवता के सुखद एवं स्वस्थ जीवन के लिए एक नई दिशा भी प्रशस्त करेगा।

इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य योग और संगीत के समन्वित प्रभाव से दर्द निवारण और निद्रा की गुणवत्ता में सुधार का वैज्ञानिक अध्ययन करना है। देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा संचालित यह प्रयास भविष्य में बिना औषधि के जटिल रोगों के उपचार की नई राह खोलेगा। हरिद्वार से शुरू हुई यह पहल वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम सिद्ध होगी।

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