
हरिद्वार। हरिद्वार स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति युवा आइकॉन डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने विदेश प्रवास के दौरान पोलैंड के सुप्रसिद्ध ‘जॉन पॉल II कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ लुब्लिन’ (केयूएल) का दौरा किया। यह संस्थान वर्ष 1918 में स्थापित है और संपूर्ण यूरोप में अपनी उच्च स्तरीय शोध परंपरा और नैतिक मूल्यों पर आधारित शिक्षा के लिए विख्यात है।

शांतिकुंज मीडिया विभाग ने विज्ञप्ति जारी कर बताया कि देसंविवि के प्रतिकूलपति डॉ. पण्ड्या ने फादर फिलिप द्वारा संयोजित भारत पर आधारित विशेष प्रदर्शनी “बेयरफुट इन इंडिया” का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिकता और जनजीवन की सहजता को वैश्विक मंच पर अत्यंत भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करती है, जो भारत के प्रति अंतरराष्ट्रीय आकर्षण का केंद्र बनी।
वहीं दूसरी ओर डॉ. पण्ड्या ने यूनिवर्सिटी के रेक्टर रेवरेंड प्रोफेसर मिरोस्लाव कालिनोव्स्की एवं वाइस रेक्टर बीटा पिस्कोर्स्का के साथ भेंट की। इस उच्च स्तरीय बैठक में भारत – पोलैंड के मध्य सांस्कृतिक संबंधों को नई ऊर्जा देने पर विचार – विमर्श हुआ। चर्चा के मुख्य केंद्र में संस्कृत एवं पोलिश भाषा का आदान – प्रदान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं अध्यात्म के आपसी संबंध जैसे आधुनिक विषय रहे।

साझा शोध पर बनी सहमति बैठक का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम दोनों विश्वविद्यालयों के मध्य शैक्षणिक, शोध और सांस्कृतिक क्षेत्रों में मिलकर कार्य करने की सहमति के रूप में सामने आया। दोनों संस्थानों के बीच होने वाली यह साझेदारी भविष्य में ज्ञान और विज्ञान के नए द्वार खोलेगी।
युवा आइकॉन डॉ. पण्ड्या की यह यात्रा पूज्य गुरुदेव के वसुधैव कुटुंबकम् के दिव्य संदेश को वैश्विक पटल पर सुदृढ़ करने और भारत – पोलैंड के मध्य सांस्कृतिक सेतु के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर सिद्ध हुई है।
