सफलता की कहानी: थारु जनजाति की राधा राना का बुटीक उद्यम के माध्यम से सशक्तिकरण

उधम सिंह नगर/खटीमा। उत्तराखंड राज्य के जनपद उधम सिंह नगर के विकासखंड खटीमा के अंतर्गत ग्राम मुड़ाकिशनी की निवासी श्रीमती राधा राना (पति श्री यतेन्द्र सिंह राना), जो थारु जनजाति समुदाय से संबंध रखती हैं, का जीवन ग्रामीण महिला सशक्तिकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता है। परियोजना से जुड़ने से पूर्व वे सीमित संसाधनों के साथ अपने घर पर ही आस-पास की महिलाओं के कपड़ों की सिलाई का कार्य करती थीं। उस समय उनके पास केवल एक सिलाई मशीन उपलब्ध थी, जिसके कारण आय अत्यंत सीमित एवं अनिश्चित थी।
श्रीमती राधा राना नन्दी बाबा स्वयं सहायता समूह (गठन तिथि: 12.07.2022) की सदस्य हैं, जो एकता ग्राम संगठन तथा जीवन ज्योति महिला क्लस्टर के अंतर्गत संचालित है। आई.एफ.ए.डी. (IFAD) द्वारा वित्तपोषित ग्रामीण उद्यम वेग वृद्धि परियोजना (REAP) के अंतर्गत ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के माध्यम से उनके कौशल को उन्नत कर उसे स्वरोजगार में परिवर्तित करने हेतु प्रोत्साहित किया गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में उन्हें व्यक्तिगत उद्यम (बुटीक) के रूप में चयनित कर आवश्यक वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग प्रदान किया गया।
उद्यम की स्थापना हेतु कुल 1,00,000 रुपये की लागत की व्यवसायिक योजना स्वीकृत की गई, जिसमें 20,000 रुपये लाभार्थी अंशदान, 30,000 रुपये परियोजना सहयोग तथा 50,000 रुपये बैंक ऋण के रूप में उपलब्ध कराए गए। उक्त वित्तीय सहायता से उन्होंने 03 नई सिलाई मशीनें एवं 01 पिको मशीन क्रय की, जिससे उनके पास कुल मशीनों की संख्या बढ़कर 05 हो गई। इससे उनके उत्पादन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।
परियोजना हस्तक्षेप के उपरांत उनके व्यवसाय में स्पष्ट रूप से प्रगति परिलक्षित हुई है। वर्तमान में उनकी मासिक आय 8,000 से 10,000 रुपये के मध्य है, जिसमें से समस्त व्यय घटाने के उपरांत वे प्रतिमाह 6,000 से 7,000 रुपये की शुद्ध बचत कर रही हैं। इसके अतिरिक्त, विवाह आदि के व्यस्त सीजन में वे 02 अन्य महिलाओं को भी अस्थायी रोजगार उपलब्ध करा रही हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिला है।
सामाजिक दृष्टिकोण से भी उनके उद्यम का सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। उनके बुटीक पर प्रतिदिन 4 से 5 महिलाएं सिलाई का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं, जिससे वे भी आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर हो रही हैं। इस आय से उनके परिवार के जीवन स्तर में सुधार हुआ है, विशेषकर बच्चों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति बेहतर ढंग से हो पा रही है। साथ ही, पारिवारिक निर्णयों में उनकी सहभागिता बढ़ी है तथा आत्मविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उपरोक्त तथ्यों के आधार पर यह स्पष्ट है कि ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन एवं समयबद्ध सहयोग से श्रीमती राधा राना ने एक सीमित संसाधनों वाली दर्जी से एक सफल उद्यमी एवं प्रशिक्षक के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है। उनका यह प्रयास न केवल उनके परिवार के आर्थिक सुदृढ़ीकरण में सहायक सिद्ध हुआ है, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत के रूप में उभरा है।

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