शिक्षक गरिमा शिविर में राजस्थान के शताधिक शिक्षक हुए सम्मानित

  • वक्ताओं ने कहा- अध्यापक हैं युग निर्माता, छात्र राष्ट्र के भाग्य विधाता

हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज एक आध्यात्मिक संस्थान ही नहीं है, वरन् यहाँ का मुख्य उद्देश्यों में से एक यह भी है कि भावी पीढ़ी को संवारने, संस्कारित करने तथा उनके भविष्य को सुखद व सफल बनाने की दिशा में भागीरथ प्रयास है। इसी क्रम में राजस्थान के शताधिक शिक्षकों को उनके अतुलनीय योगदान के लिए शांतिकुंज ने प्रशस्ति पत्र आदि भेंटकर सम्मानित किया। यह सम्मान पाकर उनके भाव प्रफुल्लित हो उठे।


प्रतिभागियों ने संस्था की अधिष्ठात्री शैलदीदी से भेंटकर आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन प्राप्त किया। इस अवसर इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शिक्षक ज्ञान देने वाला और समाज और राष्ट्र के भविष्य का निर्माता होता है। यदि शिक्षक अपने दायित्वों का संवेदनशीलता और समर्पण के साथ निर्वहन करें, तो आने वाली पीढिय़ाँ संस्कारवान, चरित्रवान और राष्ट्रनिष्ठ बन सकती हैं।
समापन सभा को संबोधित करते हुए शांतिकुंज व्यवस्थापक योगेन्द्र गिरि ने कहा कि शिक्षकों का दायित्व विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा देने के साथ-साथ उनमें मानवीय संवेदनाएँ, नैतिक मूल्य एवं आदर्श जीवन दृष्टि विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा तभी सार्थक है, जब वह व्यक्ति के व्यक्तित्व और चरित्र का समग्र विकास करे।
शिविर समन्वयक ने कहा कि इस विशेष शिविर में राजस्थान के जयपुर, भीलवाड़ा, कोटा, भरतपुर, उदयपुर, झालावाड़, नागौर सहित 35 से अधिक जिलों से आए शताधिक की संख्या में निष्ठावान शिक्षकों और शिक्षाविदों ने सहभागिता की। इस दौरान शिक्षकों को उनकी वास्तविक गरिमा, सामाजिक दायित्वों और भावी समाज के निर्माण में उनकी शैक्षणिक भूमिका के पालन के लिए प्रेरित किया गया। अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में सहभागी शिक्षकों ने भी अपने अनुभव साझा किए।
दो दिन चले इस शिविर में प्रो प्रमोद भटनागर, श्री श्याम बिहारी दुबे, श्री केपी दुबे, चक्रधर थपलियाल, डॉ सौरभ मिश्रा, कमल नारायण आदि ने भी अपने अपने विचार रखे।

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