- शहीदों को समर्पित की आज की दिव्य गंगा आरती

ऋषिकेश। मसूरी गोलीकांड की बरसी पर उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के उन अमर बलिदानियों को परमार्थ निकेतन से भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई, जिन्होंने पृथक उत्तराखण्ड राज्य के निर्माण के लिए अपने साहस, संघर्ष, संकल्प और सर्वोच्च बलिदान से इतिहास में अमिट छाप छोड़ी। इन वीर आंदोलनकारियों की शहादत उत्तराखण्ड की राज्य निर्माण यात्रा का अत्यंत मार्मिक और गौरवपूर्ण अध्याय है।
पृथक उत्तराखण्ड राज्य की मांग केवल एक राजनीतिक मांग नहीं थी, बल्कि यह पर्वतीय जनजीवन, उसकी विशिष्ट आवश्यकताओं, संस्कृति, परंपराओं, प्राकृतिक संसाधनों और स्वाभिमान की आवाज थी। दशकों तक चले इस आंदोलन में मातृशक्ति, युवाओं, विद्यार्थियों, कर्मचारियों, किसानों और समाज के विभिन्न वर्गों ने एकजुट होकर संघर्ष किया। अनेक आंदोलनकारियों ने अपने जीवन की आहुति दी और असंख्य लोगों ने कठिनाइयों, यातनाओं और संघर्षों को सहते हुए राज्य निर्माण के संकल्प को जीवंत रखा।
मसूरी गोलीकांड की घटना हमें उन कठिन दिनों की स्मृति कराती है, जब उत्तराखण्ड के लोगों ने अपने अधिकार और अपनी पहचान के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष किया। इस अवसर पर उन सभी ज्ञात-अज्ञात आंदोलनकारियों और शहीदों को नमन है, जिनके त्याग और संघर्ष के कारण आज उत्तराखण्ड एक पृथक राज्य के रूप में हमारे सामने है।
अमर बलिदानियों का जीवन और उनका संघर्ष वर्तमान पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनकी शहादत हमें यह संदेश देती है कि किसी भी महान परिवर्तन के पीछे त्याग, तपस्या, धैर्य और सामूहिक संकल्प की शक्ति होती है। उत्तराखण्ड राज्य हमें संघर्ष और बलिदान की विरासत में मिला है, इसलिए इस राज्य की प्रगति और समृद्धि केवल विकास के आंकड़ों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसका उद्देश्य यहां के लोगों के जीवन में वास्तविक खुशहाली, सम्मान और अवसर सुनिश्चित करना भी होना चाहिए।
आज आवश्यकता है कि हम शहीदों के सपनों के उत्तराखण्ड की कल्पना को व्यापक अर्थों में समझें। ऐसा उत्तराखण्ड, जहां विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के पूरक हों, जहां हमारी पवित्र नदियां निर्मल रहें, हिमालय सुरक्षित रहे, वन और जैव-विविधता संरक्षित रहें तथा गांवों में रोजगार और शिक्षा के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हों। ऐसा उत्तराखण्ड, जहां पलायन की विवशता कम हो और युवा अपने ही प्रदेश में अपनी प्रतिभा और क्षमता का उपयोग करते हुए प्रदेश के निर्माण में सहभागी बन सकें।
उत्तराखण्ड की पहचान केवल इसके सुंदर पर्वतीय भू-दृश्यों से नहीं, बल्कि इसकी आध्यात्मिक चेतना, देवभूमि की परंपरा, लोकसंस्कृति, लोकभाषाओं, लोककलाओं और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व की जीवनशैली से भी है। राज्य आंदोलन के बलिदानियों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम इस विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखें।
आज जब पूरा विश्व पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास कर रहा है, उत्तराखण्ड के पास प्रकृति और संस्कृति के संतुलन का अपना प्राचीन ज्ञान है। हिमालय और गंगा केवल उत्तराखण्ड की प्राकृतिक धरोहर नहीं, बल्कि भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना के आधार हैं। इसलिए इनके संरक्षण को उत्तराखण्ड के विकास की मूल धारा से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
शहीदों के सपनों का उत्तराखण्ड वह होगा जहां आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार हों, विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण हो, पर्यटन के साथ स्थानीय समुदायों की समृद्धि हो, आध्यात्मिकता के साथ सेवा की भावना हो और आधुनिक तकनीक के साथ अपनी जड़ों से जुड़ाव बना रहे।
इस पावन अवसर पर हम सभी का दायित्व है कि उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के इतिहास को केवल स्मरण करने तक सीमित न रखें, बल्कि उसके मूल्यों को अपने जीवन और कार्यों में उतारें। युवाओं को राज्य आंदोलन के इतिहास, आंदोलनकारियों के संघर्ष और शहीदों के योगदान से परिचित कराना भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां समझ सकें कि उत्तराखण्ड का निर्माण किन संघर्षों और बलिदानों की नींव पर हुआ है।
आइए, इस बरसी पर हम उत्तराखण्ड के अमर बलिदानियों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए यह संकल्प लें कि उनके त्याग को व्यर्थ नहीं जाने दें। हम ऐसा उत्तराखण्ड बनाने के लिए मिलकर कार्य करेंगे जो विकास की दृष्टि से सशक्त, पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित, संस्कृति की दृष्टि से समृद्ध, आध्यात्मिक दृष्टि से जागृत और मानवीय मूल्यों की दृष्टि से आदर्श हो।
उत्तराखण्ड के अमर शहीदों को शत्-शत् नमन। उनका बलिदान हमारी प्रेरणा है, उनका संघर्ष हमारी विरासत है और उनके सपनों का उत्तराखण्ड हमारा संकल्प है।



