भगवान सूर्य ही सृष्टि के प्रत्यक्ष देवता हैं : स्वामी विज्ञानानंद

 

 

 

हरिद्वार। श्रीगीता विज्ञान आश्रम के परम अध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा है कि भगवान सूर्य ही सृष्टि के प्रत्यक्ष देवता हैं जिनके प्रकाश से जीव एवं वनस्पतियों का जीवन संचालित होता है और मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की गति बदलने से संपूर्ण प्रकृति का वातावरण बदल जाता है। वे दक्षनगरी के राजा गार्डन स्थित हनुमान मंदिर सत्संग हॉल में मकर संक्रांति उत्सव में पधारे भक्तों को प्रकृति में होने वाले परिवर्तनों की जानकारी दे रहे थे।
मकर संक्रांति का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि भगवान सूर्य जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं तो मौसम का स्वरूप बदलने लगता है। सूर्य के प्रकाश में गर्मी बढ़ती है और सर्दी का प्रभाव कम होने लगता है। मकर संक्रांति को ग्रह और राशि के बदलने का पर्व बताते हुए उन्होंने कहा कि सूर्य की गति बदलने से ही जीवधारियों एवं वनस्पतियों में बदलाव आता है। सूर्य के उत्तरायण होने पर प्रकाश डालते हुए महामंडलेश्वर स्वामी विज्ञानानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि सूर्य की किरणें सबसे ज्यादा दक्षिण की ओर झुकने के बाद उत्तर की ओर लौटने लगती हैं। मकर संक्रांति को मेल मिलाप और पारिवारिक सद्भाव का प्रतीक बताते हुए कहा कि आज के दिन भगवान सूर्य स्वयं अपने पुत्र शनि देव से मिलने आते हैं। मकर संक्रांति पर सूर्य उपासना का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि सूर्य की आराधना करने से मानव तन में नई ऊर्जा का संचार होता है और उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु का वरदान मिलता है। मकर संक्रांति के स्नान दान का महत्व बताते हुए शतायु संत ने कहा कि गंगा स्नान कर तिल-गुड़ और खिचड़ी का दान करना चाहिए और जो लोग गंगा स्थान नहीं कर पाते उन्हें नहाने के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करना चाहिए तथा सूर्य नमस्कार के साथ सूर्य को गंगाजल का अर्घ देने से पाप-ताप और संतापों से मुक्ति मिलती है। अंत में सभी भक्तों ने खिचडी प्रसाद ग्रहण कर गुरुगद्दी का आशीर्वाद प्राप्त किया।

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