देसंविवि में सात दिवसीय राष्ट्रीय एकीकरण शिविर का शुभारंभ

  • भारतीय संस्कृति का मूल आधार हमारे संस्कार, सेवा और समर्पण की भावना: डॉ चिन्मय पण्ड्या
  • देवसंस्कृति विश्वविद्यालय की तपोभूमि ‘लघु भारत’ का स्वरूप: त्रिवेंद्र सिंह रावत

हरिद्वार। देव संस्कृति विश्वविद्यालय परिसर राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक समरसता के रंगों से सराबोर हो उठा, जब राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के राष्ट्रीय एकीकरण शिविर का शुभारम्भ देवसंस्कृति विवि के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत तथा कैबिनेट मंत्री श्रीमती रेखा आर्या ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस शिविर में देश के कर्नाटक, छग, मप्र, ओडिशा, हिप्र, दिल्ली सहित 13 राज्यों और 185 विश्वविद्यालयों से आए एक हजार से अधिक युवा भाग ले रहे हैं। पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवाओं ने भारत की सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता का जीवंत चित्र प्रस्तुत किया, जिससे पूरा परिसर ‘लघु भारत’ का स्वरूप प्रतीत हुआ।
उद्घाटन शिविर का अध्यक्षता कर रहे प्रतिकुलपति डॉ. चिन्मय पण्ड्या ने कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार हमारे संस्कार, सेवा और समर्पण की भावना है। यही मूल्य हमें परिवार, समाज और राष्ट्र से जोड़ते हैं तथा जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिक शिक्षा और तकनीकी प्रगति के साथ-साथ भारतीय जीवन मूल्यों को भी आत्मसात करें। प्रतिकुलपति ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद भारत निरंतर चहुंमुखी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में देश ने उल्लेखनीय उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं। इस विकास यात्रा में युवाशक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि युवा सकारात्मक सोच, अनुशासन और राष्ट्रहित की भावना के साथ कार्य करें, तो भारत विश्व पटल पर और अधिक सशक्त एवं आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित होगा।
इस अवसर पर सांसद श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि देसंविवि त्याग, तपस्या और साधना की पावन तपोभूमि है। यहां एकत्रित युवा विविधता में एकता का संदेश दे रहे हैं। उन्होंने भारत की तीव्र प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि देश औद्योगिकीकरण, बुनियादी ढांचे और रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है। कोरोना काल की चुनौतियों के बावजूद भारत ने अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाए रखा और वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत की। श्रीमती रेखा आर्या ने कहा कि विकसित भारत 2047 का संकल्प युवा शक्ति के परिश्रम और नवाचार से ही साकार होगा। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय एकीकरण शिविर युवाओं में नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करने का सशक्त मंच है।
कार्यक्रम से पूर्व अतिथियों ने शौर्य दीवार पर अमर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। अध्यक्षता विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति डॉ. चिन्मय पंड्या ने की। अनेक गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में शिविर का शुभारंभ उत्साहपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर श्री समरदीप सक्सेना, शांतिकुंज के व्यवस्थापक श्री योगेंद्र गिरि सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

More From Author

डीएम का कोरोनेशन निरीक्षण; पैथोलॉजी का समय 1 घंटे बढा; अनुबन्धित चंदन लैब की 24 घंटे उपस्थिति की पिछले 03 माह की रिपोर्ट तलब

जिलाधिकारी ने विभिन्न विभागों के माध्यम से संचालित योजनाओं की समीक्षा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Comments

No comments to show.