शहरों से ग्रामीण क्षेत्रों तक भालुओं का आंतक, दशहत में लोग

गोपेश्वर (चमोली)। चमोली जिला मुख्यालय गोपेश्वर समेत अनेक स्थानों पर भालुओं का आंतक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इससे सुबह और सांय को लोगों का घरों से निकालना दूभर हो गया है। गोपेश्वर शहर के निकटवर्ती क्षेत्रों में अब दिन दोपहर भालुओं का विचरण आम हो गया है। जिला मुख्यालय के ब्रह्मसैण, लीसा बैंड, पोखरी बैंड, आईटीआई क्षेत्र समेत अनेक स्थानों पर सुबह और सांय को भालुओं को विचरण करते हुए देखा जा रहा है। इसका वीडियो भी सोशल मीडिया पर लगातार वायरल होता जा रहा है लेकिन वन विभाग भालुओं को पकड़ने के लिए कोई ठोस करता हुआ नजर नहीं आ रहा है। इसको लेकर लोगों में भारी रोष व्याप्त है। सामाजिक संगठनों से लेकर राजनैतिक दल व स्थानीय ग्रामीण वन विभाग के कार्यालयों को चक्कर काट कर परेशान हो गए हैं पर समस्या का समाधान होता नहीं दिख रहा है। स्थानीय निवासी योगेंद्र सिंह बिष्ट, सूर्य प्रकाश पुरोहित, अनूजा पोखरियाल, कांग्रेस के अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के उपाध्यक्ष दर्शन लाल विश्वकर्मा का कहना है कि जिला मुख्यालय गोपेश्वर के आसपास के क्षेत और इससे सटे गांवों में लगातार भालुओं को विचरण करते हुए देखा जा सकता है। इससे लोग डरे सहमे हुए हैं। उन्होंने जिला प्रशासन और वन विभाग से आम लोगों की सुरक्षा की गुहार लगाते हुए भालुओं को मारने अथवा पकड़ने की मांग की है।

भारतीय मानवाधिकार एसोसिएसन के जिलाध्यक्ष जसवंत लाल ने भी इस संबंध में मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर उत्तराखंड के तमाम क्षेत्रों में फैल रहे भालुओं के आंतक से निजात दिलाने की मांग की है।

पोखरी। पोखरी क्षेत्र में भी भालुओं का आंतक कम होने का नाम नहीं ले रहा है। सोमवार को बिनगढ क्षेत्र की महिलाएं जब मवेशियों को चारापत्ति लेने जंगल की ओर जा रही थी तो उन्हें प्राथिमक विद्यालय बिनगढ के पास के जंगल में भालू दिखाई दिए। हो-हल्ला करने के बाद किसी तरह भालुओं को भगाया गया। प्रधान ममता चौहान और पूर्व प्रधान हर्षवर्धन चौहान ने इसकी सूचना केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग के नागनाथ रेंज को दी। सूचना पर वन दरोगा मदन मोहन सेमवाल, वन आरक्षी महेशी देवी, शालिनी सहित वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और ग्रामीणों से सावधानी बरतने की अपील की।

विद्यालय के शिक्षक गिरीश चंद्र सती ने बताया कि विद्यालय के चारों ओर घना जंगल होने से बच्चों में भय का वातावरण बना हुआ है। इससे बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने वन विभाग से मांग की कि क्षेत्र में सक्रिय भालू को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाए जाने की मांग की है। 

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