महिलाओं की आर्थिकी का जरिया बना मशरूम  

गोपेश्वर (चमोली)। अपनी आर्थिकी को मजबूत करने के लिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने मशरूम उत्पादन को स्वरोजगार का जरिया बनाया है। ग्राम्य विकास विभाग के अंतर्गत ग्रामोत्थान परियोजना (रीप) के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को सूक्ष्म एवम् लघु उद्यमों से जोड़ने का कार्य कर रही है। दशोली ब्लॉक के आजीविका समन्वयक देवेंद्र नेगी बताते हैं कि इस वित्तीय वर्ष में अब तक ब्लॉक में 21 महिलाओ को विभिन्न आजीविका संवर्धन गतिविधियों के तहत मिनी डेयरी, मशरूम उत्पादन, मुर्गी पालन, इंटीग्रेटेड फार्मिंग, सिलाई सेंटर, ब्यूटीपार्लर, हेयर सैलून, रिटेल शॉप, फोटो एवम् वीडियोग्राफी से जोड़ा गया है। 10 महिलाओ के आवेदन भरकर बैंक लोन स्वीकृत किए गए हैं।

रीप परियोजना के अंतर्गत व्यक्तिगत उद्यम मद में स्वरोजगार हेतु 30 प्रतिशत तक की सहायता की जा रही है। बैंक लोन एवम् रेखीय विभागो के साथ कन्वर्जेंस करवा कर महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। बणद्वारा स्वयं सहायता समूह की देवेश्वरी देवी तथा रौलीग्वाड भगवती आजीविका समूह की नीलम देवी को भी रीप परियोजना की ओर से तीस तीस हजार रूपए की वित्तीय सहायता दी गई है। इसके जरिए वे मशरूम उत्पादन में जुटे हुए है। हरियाली स्वायत सहकारिता देवर खडोरा में कार्यरत  कुलदीप सिंह बताते हैं कि नीलम देवी हर रोज 20 से 25 किलो मशरूम का उत्पादन का अच्छा मुनाफा कमा रही है।

गैरसैण ब्लॉक में रीप परियोजना के तत्वाधान में महिलाओं की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया जा रहा है। मशरूम तथा अन्य उत्पादकता क्षेत्रों में महिलाएं मेहनत के जरिए रोजगार के संसाधनों को बढ़ावा दे रही है। इसी के चलते बेहतर कार्य करने पर रीप एमएंडडी शिवम पोखरियाल को पुरस्कृत किया गया है। कहा जा सकता है कि रीप परियोजना महिलाओं के लिए वरदान बनती जा रही है।

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