डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी का जीवन राष्ट्रनिष्ठा, सांस्कृतिक चेतना और अखण्ड भारत के संकल्प का अमर प्रतीक

  •  विश्व को करुणा, शांति, अहिंसा और मानवता का अमूल्य संदेश देने वाले परम पूज्य परम पावन 14वें दलाई लामा जी को उनके 91वें जन्मदिवस पर परमार्थ निकेतन की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ
  • अखण्ड भारत के प्रणेता, प्रखर राष्ट्रवादी, दूरदर्शी शिक्षाविद् एवं भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की 125वीं जयंती पर परमार्थ निकेतन में किया विशेष यज्ञ
  • आज की परमार्थ गंगा आरती दोनों महापुरूषों को की समर्पित

ऋषिकेश। अखण्ड भारत के प्रणेता, प्रखर राष्ट्रवादी, दूरदर्शी शिक्षाविद् एवं भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की 125वीं जयंती के पावन अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने भावभीनी श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुये कहा कि डॉ. मुखर्जी का सम्पूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, सांस्कृतिक अस्मिता, शिक्षा, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय एकता के आदर्शों को समर्पित रहा। उनका जीवन युवाओं को राष्ट्र सर्वोपरि का संदेश देता है।


पूज्य स्वामी जी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारत की सांस्कृतिक आत्मा के सजग प्रहरी, विलक्षण चिंतक और दूरदर्शी राष्ट्रनिर्माता थे। उन्होंने शिक्षा को केवल ज्ञानार्जन का माध्यम नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, राष्ट्रीय चेतना और सामाजिक उत्तरदायित्व का आधार माना। आज जब भारत आत्मनिर्भरता, नवाचार, पर्यावरण संरक्षण, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब डॉ. मुखर्जी का सशक्त, समृद्ध और आत्मनिर्भर भारत का दृष्टिकोण पहले से अधिक प्रासंगिक है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का उद्घोष एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे, केवल एक राजनीतिक नारा नहीं था, बल्कि भारत की अखण्डता, एकता और राष्ट्रीय अस्मिता के प्रति उनकी अटूट निष्ठा का उद्घोष है। उन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखते हुए अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका यह त्याग आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारत की सनातन संस्कृति हमें वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश देती है, किन्तु विश्व परिवार का नेतृत्व वही राष्ट्र कर सकता है जिसकी जड़ें अपनी संस्कृति, मूल्यों और राष्ट्रीय एकता में दृढ़ हों। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भारतीय संस्कृति, शिक्षा और राष्ट्रवाद को एक सूत्र में पिरोते हुए ऐसे भारत की कल्पना की थी जो आध्यात्मिक रूप से समृद्ध, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर, सामाजिक रूप से समरस और सांस्कृतिक रूप से जागृत हो।
उन्होंने कहा कि आज का युवा वर्ग डॉ. मुखर्जी के जीवन से साहस, निष्ठा, राष्ट्रसेवा और नेतृत्व के अमूल्य गुणों का अनुसरण करे। राष्ट्र निर्माण, सहभागिता, सेवा, अनुशासन, नैतिकता और सकारात्मक योगदान से ही संभव है। जब युवा अपने जीवन में उत्कृष्ट चरित्र, सेवा भावना और राष्ट्रप्रेम को अपनाएंगे, तभी भारत विश्व को शांति, सतत विकास, आध्यात्मिकता और मानवीय मूल्यों का मार्ग दिखाने में और अधिक समर्थ होगा।
आइए, उनकी 125वीं जयंती पर हम संकल्प लें कि अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक पालन करते हुए, सेवा, समर्पण, सद्भाव और राष्ट्रप्रेम के मार्ग पर आगे बढ़ें तथा एक ऐसे भारत के निर्माण में अपना योगदान देंगे जो आध्यात्मिक रूप से जागृत, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध, पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी और विश्व के लिए प्रेरणास्रोत बने।
आज विश्व को करुणा, शांति, अहिंसा और मानवता का अमूल्य संदेश देने वाले परम पूज्य परम पावन 14वें दलाई लामा जी को उनके 91वें जन्मदिवस पर परमार्थ निकेतन की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ अर्पित की।
उनका संपूर्ण जीवन करुणा, प्रेम, सहिष्णुता, संवाद और सार्वभौमिक मानव मूल्यों की सजीव अभिव्यक्ति है। ईश्वर से प्रार्थना है कि परम पावन दलाई लामा जी सदैव स्वस्थ, दीर्घायु एवं ऊर्जावान रहें तथा उनकी दिव्य प्रेरणा मानवता को प्रेम, सद्भाव, सह-अस्तित्व और आत्मिक जागृति के पथ पर निरंतर अग्रसर रहे। उनके करुणामय विचार सम्पूर्ण विश्व में शांति, एकता और वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना को और अधिक सशक्त करें।

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