“पशु सखी बनी पहचान: मोनिका बिस्वास ने सेवा, समर्पण और आत्मनिर्भरता की लिखी नई कहानी”

  • “जब एक महिला स्वयं सशक्त होती है, तो वह पूरे गांव के विकास की आधारशिला बन जाती है।”

सितारगंज। ऊधम सिंह नगर जनपद के सितारगंज विकासखंड अंतर्गत देवनगर गांव की निवासी श्रीमती मोनिका बिस्वास, पत्नी श्री पुनेन्दु बिस्वास, कभी एक साधारण गृहिणी थीं। परिवार की आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं था और आर्थिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना एक बड़ी चुनौती थी। मन में कुछ नया करने की इच्छा अवश्य थी, लेकिन अवसर और उचित मार्गदर्शन के अभाव में वे अपने सपनों को आकार नहीं दे पा रही थीं।


मोनिका बिस्वास देवनगर स्वयं सहायता समूह (SHG) की सदस्य हैं, जो सीता महिला ग्राम संगठन (VO) के अंतर्गत तथा बढ़ते कदम क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF), शक्तिफार्म से संबद्ध है। वर्ष 2023-24 में IFAD-वित्तपोषित ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना के अंतर्गत उनका चयन पशु सखी के रूप में किया गया। उन्होंने उत्तराखण्ड लाइवस्टॉक डेवलपमेंट बोर्ड (ULDB), ऋषिकेश में आयोजित A-HELP (Accredited Agent for Health and Extension of Livestock Production) के 17 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण किया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें पशु स्वास्थ्य प्रबंधन, टीकाकरण, कृत्रिम गर्भाधान में सहयोग, पशु बीमा, डिस्टोसिया (कठिन प्रसव), प्राथमिक उपचार तथा पशुपालन से संबंधित तकनीकी एवं व्यवहारिक ज्ञान प्रदान किया गया। प्रशिक्षण उपरांत उन्होंने अपने क्षेत्र में पशु सखी के रूप में कार्य प्रारम्भ किया और आज वे ग्रामीण पशुपालकों के लिए एक विश्वसनीय पशु सेवा प्रदाता के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं।


एक पशु सखी के रूप में मोनिका बिस्वास नियमित रूप से पशुओं के टीकाकरण, पशु बीमा, डिस्टोसिया (कठिन प्रसव) में सहायता, प्राथमिक उपचार एवं अन्य पशु स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। उनके प्रयासों से पशुपालकों को समय पर गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल रही हैं, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य, दुग्ध उत्पादन और पशुपालकों की आय में सकारात्मक वृद्धि देखने को मिली है। गांवों में पशुपालन के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना के अंतर्गत उन्हें प्रतिमाह ₹2,500 का स्टाइपेंड/मानदेय भी प्रदान किया जाता है। पिछले 36 महीनों में उन्होंने अपने कार्य के माध्यम से ₹2,24,700 की कुल आय अर्जित की, जबकि कुल ₹72,000 का व्यय हुआ। इस प्रकार उन्हें ₹1,52,700 का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। वर्तमान में वे पशु सखी के रूप में कार्य करते हुए प्रतिमाह लगभग ₹4,000 से ₹5,000 की अतिरिक्त नियमित आय अर्जित कर रही हैं, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है।
आज मोनिका बिस्वास केवल अपने परिवार की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अपने क्षेत्र की पशुपालक महिलाओं और किसानों के लिए एक भरोसेमंद सहयोगी एवं प्रेरणास्रोत बन चुकी हैं। उनकी सेवाओं के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में पशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ी है, समय पर उपचार उपलब्ध होने लगा है तथा पशुपालन को एक अधिक लाभकारी आजीविका के रूप में अपनाने का विश्वास भी मजबूत हुआ है। उनकी बढ़ती आय से परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है और उनका आत्मविश्वास तथा सामाजिक सम्मान दोनों बढ़े हैं।
मोनिका बिस्वास का मानना है कि IFAD-वित्तपोषित ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना ने उन्हें केवल आजीविका का अवसर ही नहीं दिया, बल्कि समाज की सेवा करने, स्वयं की पहचान स्थापित करने और ग्रामीण पशुपालकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम भी बनाया। आज वे पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने क्षेत्र में सेवाएं प्रदान कर रही हैं और अनेक महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।
मोनिका बिस्वास की यह प्रेरणादायक यात्रा इस बात का सशक्त उदाहरण है कि यदि महिलाओं को गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, सही मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग मिले, तो वे न केवल आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं, बल्कि ग्रामीण समाज में परिवर्तन की प्रभावशाली वाहक भी बन सकती हैं। ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना के माध्यम से एक साधारण गृहिणी से सफल “पशु सखी” बनने तक का उनका यह सफर हजारों ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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