गुरु ही जीवन का मार्ग दिखाता है, गुरु के बिना ज्ञान अधूरा: महंत हरी गिरि महाराज
हरिद्वार। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर श्री पंच दश नाम जूना अखाड़े में श्रद्धा और उल्लास का माहौल रहा। अखाड़े के इष्ट देव भगवान गुरु दत्तात्रेय की विशेष पूजा-अर्चना और अभिषेक वैदिक मंत्रेच्चार के साथ संपन्न हुआ। अखाड़े के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक श्री महंत हरी गिरि महाराज इस अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे और भक्तों को आशीर्वाद प्रदान किया। प्रातः काल से ही गुजरात, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के बिजनौर सहित विभिन्न प्रांतों से आए महाराज के शिष्य अखाड़े पहुंचे। सभी ने गुरु महाराज के चरणों में वंदना की, कथा श्रवण की और गुरु दीक्षा का आशीर्वाद प्राप्त किया।
पूजा के बाद महंत हरी गिरि महाराज ने कहा कि गुरु ही जीवन का मार्ग दिखाता है। गुरु के बिना ज्ञान अधूरा है। उन्होंने सभी शिष्यों को सेवा, संयम और धर्म के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। यह दिन गुरु-शिष्य परंपरा का प्रतीक है। मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेद व्यास का जन्म हुआ था, जिन्होंने चारों वेदों, 18 पुराणों और महाभारत की रचना की। इसीलिए इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। सनातन परंपरा में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान दर्जा दिया गया है। इस दिन शिष्य अपने गुरु की पूजा करते हैं, उनसे आशीर्वाद लेते हैं और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा पाते हैं। जूना अखाड़े जैसी प्राचीन परंपराओं में यह पर्व विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, क्योंकि यहां गुरु-शिष्य संबंध को साधना का मूल आधार माना जाता है।
