- राष्ट्रीय खेल दिवस पर खिलाड़ियों और देश के युवाओं को स्वस्थ, अनुशासित एवं राष्ट्रनिर्माण के संकल्प का संदेश
- “खेलेंगे तो स्वस्थ रहेंगे, अनुशासित रहेंगे तो आगे बढ़ेंगे और राष्ट्रप्रेम से जुड़ेंगे तो भारत को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगे”

ऋषिकेश। हॉकी के जादूगर, महान भारतीय खिलाड़ी और ‘पद्म भूषण’ मेजर ध्यानचंद जी की जयंती के पावन अवसर पर उन्हें परमार्थ निकेतन से विनम्र श्रद्धांजलि। उनकी अद्भुत खेल प्रतिभा, अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रप्रेम ने भारतीय खेल जगत को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया। उनकी स्मृति में मनाया जाने वाला राष्ट्रीय खेल दिवस केवल खेल प्रतिभाओं का सम्मान करने का अवसर नहीं, बल्कि खेलों को जीवन का अभिन्न संस्कार बनाने और राष्ट्र के स्वस्थ, सशक्त एवं अनुशासित भविष्य के निर्माण का संकल्प लेने का दिन है।
मेजर ध्यानचंद जी ने अपने खेल कौशल से यह सिद्ध किया कि जब प्रतिभा के साथ साधना, अनुशासन और राष्ट्र के प्रति समर्पण जुड़ जाता है, तो सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रहती, बल्कि वह पूरे राष्ट्र के गौरव का कारण बन जाती है। उनके हाथों में हॉकी की स्टिक केवल एक खेल उपकरण नहीं थी, वह भारत के आत्मविश्वास, सामर्थ्य और तिरंगे के गौरव की प्रतीक बन गई थी। उनके खेल ने दुनिया को भारतीय प्रतिभा की शक्ति से परिचित कराया और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसी प्रेरणा छोड़ी, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक है।
राष्ट्रीय खेल दिवस हमें याद दिलाता है कि खेल केवल मैदान पर जीत-हार का विषय नहीं है। खेल जीवन जीने की कला सिखाता है। खेल हमें अनुशासन, धैर्य, संघर्ष, टीम भावना, नेतृत्व, आत्मविश्वास और विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ते रहने का संस्कार देता है। मैदान में खिलाड़ी जिस प्रकार हार के बाद उठकर फिर प्रयास करता है, उसी प्रकार जीवन में भी असफलताओं को सीख में बदलकर आगे बढ़ना ही वास्तविक विजय है।
आज भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ऊर्जा है। आवश्यकता है कि हमारे युवा अपनी इस ऊर्जा को सकारात्मक दिशा दें। मोबाइल और डिजिटल दुनिया के बढ़ते प्रभाव के बीच खेल का मैदान हमारे बच्चों और युवाओं को स्वस्थ शरीर, संतुलित मन और मजबूत व्यक्तित्व प्रदान कर सकता है।
भारत की समृद्ध परंपरा में शरीर और मन की साधना को सदैव विशेष महत्व दिया गया है। योग हमें भीतर से संतुलित करता है और खेल हमें बाहर से सशक्त बनाता है। जब योग की शांति, खेल का उत्साह, अनुशासन की शक्ति और राष्ट्रप्रेम की भावना एक साथ जुड़ती है, तब एक स्वस्थ, समर्थ और संस्कारवान भारत का निर्माण होता है।
आज के दिन हम देश के प्रत्येक खिलाड़ी, प्रशिक्षक, खेल शिक्षक, अभिभावक और उन सभी लोगों को नमन करते हैं, जो भारत की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने में अपना योगदान दे रहे हैं। छोटे-छोटे गांवों, कस्बों और दूरदराज के क्षेत्रों से निकलकर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करने वाले खिलाड़ियों की संघर्षगाथाएं पूरे देश के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
आइए, मेजर ध्यानचंद जी के जीवन से प्रेरणा लेकर खेल को साधना, अनुशासन को जीवन-मंत्र और राष्ट्रसेवा को सर्वाेच्च लक्ष्य बनाएं। अपने शरीर को स्वस्थ, मन को सकारात्मक, विचारों को ऊँचा और कर्मों को राष्ट्रहित में समर्पित करने का संकल्प लें।



