- रक्षा बंधन पर जब ब्रह्माकुमारीज की राखी के बंधन में बंध गए संत
हरिद्वार । प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के हरिद्वार सेवा केंद्र के अनुभूति धाम पर रक्षाबंधन के अवसर पर संत गोष्ठी का आयोजन किया गया। मुम्बई के उल्लासनगर सेवाकेंद्र की प्रभारी सोम दीदी ने ब्रह्माकुमारीज संस्थापक ब्रह्माबाबा के साथ का अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि हम सबकी एक ही भावना है कि हम मुक्त हो जाए। लेकिन आप मुक्ति और जीवन मुक्ति में से क्या चाहते है, उन्होंने स्वयं को सन्यासिन कहते हुए कहा कि मैं घर मे रहकर भी सन्यासिन हूं। वहीं पुष्पा दीदी ने भी रक्षा बंधन की रूहानियत का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हमारा मन एक मंदिर है, जिसमे परमात्मा की याद का दीपक हमेशा जलते रहना चाहिए। हमे कर्म के साथ योग जोड़कर वास्तविक रक्षा बंधन पर्व मनाना चाहिए। गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए ब्रह्माकुमारीज देहरादून सब जोन इंचार्ज राजयोगिनी मंजू दीदी ने कहा कि भाई बहन से पवित्र कोई रिश्ता नही होता, जो हमे विकारो से मुक्त रहने की सीख देता है।
राखी भी प्रतीक है सकारात्मक संकल्प का, कोई भाई बहन की रक्षा नही कर सकता, रक्षा तो वास्तव में हम सबकी परमात्मा ही करता है। कार्यक्रम में साध्वी प्राची ने कहा कि श्रावणी पर्व का अर्थ है ज्ञान अर्थात वेदों का ज्ञान प्राप्त करने के अवसर को ही रक्षा बंधन कहते है, यही अवसर परमात्मा को जानने व स्वयं विकारमुक्त होने का है। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारीज बहने शांति का प्रतीक है। हमें शिवबाबा के मिशन को आगे बढाने का संकल्प ले। सहारनपुर से आए महामंडलेश्वर कमल किशोर महाराज ने कहा कि मैं जब भी ब्रह्माकुमारीज केंद्र आता हूं तो पहले शिव बाबा के कक्ष में जाकर उनसे संवाद करता हूं, आज भी रक्षा बंधन व इंदिरियो पर नियंत्रण को लेकर आत्मसात हुआ। ब्रह्माकुमारीज बहने हमे राखी बांधकर हमारी इन्द्रियों का बंधन करती है, ताकि हम पतित से पावन अर्थात संत बन सके। ऋषिकेश से आए महामंडलेश्वर स्वामी अभिषेक चैतन्य महाराज ने रक्षा बंधन को आत्म रक्षण से जोड़ते हुए कहा कि उपनिषद व वेदों की चर्चा की। महंत गिरवर दास ने कहा कि ब्रह्माकुमारीज की एकता, प्रेम, और सेवा भाव से संत समाज बहुत प्रभावित है। संतो को यहां आकर अपनेपन का अनुभव होता है।
निस्वार्थ स्नेह का अनुभव होता है। ईश्वरीय प्रेम का अनुभव होता है। ब्रह्माकुमारीज व संत समाज का लक्ष्य एक ही है, इसलिए हम सब एक होकर रहेंगे। ब्रह्माकुमारी बीके मीना दीदी ने संतो का इस अवसर पर गरिमामयी स्वागत किया। ब्रह्माकुमारी मंजू दीदी ने माउंट आबू से आए रक्षाबंधन ईश्वरीय सन्देश संतो को पढ़कर सुनाया और उन्हें रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर ब्रह्माकुमारीज बहनो व संतो द्वारा दीप प्रज्ज्वलित किये गये। बहनो ने सभी सन्त महात्माओं की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा व सभी को मीठा बोलने की प्रतीक मिठाई खिलाकर उनका मुख मीठा कराया। गोष्ठी में स्वामी सूर्य दास, स्वामी कमलेशानन्द, महंत अरुण दास महाराज, शास्त्री ज्ञानानन्द महाराज। इस अवसर पर ब्रह्मा कुमार सुशील भाई, रुड़की केंद्र प्रभारी बीके गीता दीदी, बीके शीलू दीदी, बीकेआरती दीदी, वरिष्ठ साहित्यकार गोपाल नारसन, लक्ष्मण सिंह सहित अनेक महामंडलेश्वर, संत, महंत उपस्थित रहे। इस संत गोष्ठी का संचालन स्वामी हरिहरानंद ने किया।



