जन्मशताब्दी का संदेश लेकर जापान पहुंचे डॉ. चिन्मय पण्ड्या

  • जन्मशताब्दी वर्ष की वैश्विक श्रृंखला में जापान का पहला माँ गायत्री मंदिर में हुई प्राण प्रतिष्ठा
  • गायत्री महायज्ञ में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों सहित प्रवासी भारतीयों की भागीदारीे

टोक्यो (जापान)/ हरिद्वार। माता भगवती देवी शर्मा के जन्मशताब्दी वर्ष का संदेश लेकर गायत्री तीर्थ शान्तिकुंज के प्रतिनिधि डॉ चिन्मय पण्ड्या जापान के टोक्यो पहुँचे। इस दौरान जापान में तेज बारिश और टाइफून का असर के बीच टोक्यो में श्रद्धा का वातावरण बना रहा। गायत्री परिवार के प्रतिनिधि डॉ. चिन्मय पंड्या की उपस्थिति में जापान की धरती में माँ गायत्री मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई।
शांतिकुंज केंद्रीय टोली और स्थानीय गायत्री परिवार के परिजनों की सहभागिता में 11 कुंडीय यज्ञ हुआ। वैदिक मंत्रों और गायत्री महामंत्र के उच्चारण के बीच साधकों ने विश्वशांति और मानव कल्याण की मंगलकामना की।


शान्तिकुंज मीडिया विभाग द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार टोक्यो का यह आयोजन परमवंदनीया माता भगवती देवी शर्मा की जन्मशताब्दी वर्ष के वैश्विक कार्यक्रमों की श्रृंखला से जुड़ा रहा। डॉ. चिन्मय पंड्या जापान प्रवास के दौरान जन्मशताब्दी वर्ष के संदेश को गायत्री परिवार के परिजनों और कार्यकर्ताओं तक पहुंचा रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में स्थानीय स्तर पर साधना, जनसंपर्क और आगामी जन्मशताब्दी कार्यक्रमों की तैयारियों को गति दी जा रही है।


विज्ञप्ति के अनुसार डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि माता भगवती देवी शर्मा का जीवन त्याग, साधना, सेवा और मातृशक्ति जागरण की प्रेरणा देता है। जन्मशताब्दी वर्ष में उनके विचारों को जीवन में उतारने और समाज में सकारात्मक चेतना जगाने का अवसर बनाया जाए। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और माताजी ने भारतीय संस्कृति के माध्यम से मानव-एकता, सद्भाव और वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि माँ गायत्री की साधना मनुष्य के भीतर सद्बुद्धि, संवेदना और सेवा की भावना को जागृत करती है। जापान में मंदिर की स्थापना इसी साधना को नियमित रूप से आगे बढ़ाने का अवसर है।
प्राण-प्रतिष्ठा समारोह में मौसम की चुनौती के बावजूद स्थानीय नागरिकों सहित प्रवासी भारतीय पूरे उत्साह के साथ श्रद्धा भाव से कार्यक्रम स्थान में बैठे रहे। यज्ञ के दौरान विश्वशांति, सद्भावना और मानव बंधुत्व के लिए सामूहिक प्रार्थना की गई। विज्ञप्ति में कहा गया कि टोक्यो में माँ गायत्री मंदिर की स्थापना जन्मशताब्दी वर्ष के वैश्विक विस्तार की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनी। शांतिकुंज की प्रेरणा और डॉ. चिन्मय पंड्या के मार्गदर्शन में जापान में गायत्री साधना को आगे बढ़ाने का नया आधार तैयार हुआ।

More From Author

सीएम धामी शामिल हुए कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज के जन्मदिवस समारोह में

डीएम दीक्षित ने की जनपद में संचालित विभिन्न योजनाओं की समीक्षा

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Comments

No comments to show.