- परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने टीविन टावर्स से अर्पित की भावभीनी श्रद्धाजंलि

न्यूयॉर्क। 11 सितंबर 2001, एक ऐसा दिन, जब दुनिया ने हजारों लोगों, परिवारों के सपनों और असंख्य आशाओं को एक पल में बिखरते देखा। उस दिन आतंक की हिंसा ने निर्दाेष लोगों को उनके अपनों से असमय छीन लिया। पीछे रह गए परिवारों की आँखों में प्रतीक्षा, हृदयों में अपूरणीय रिक्तता और जीवनभर साथ चलने वाला एक मौन दर्द।
आज परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने टीविन टावर्स पर हुए आतंकवादी हमले में मारे गए सभी निर्दाेष आत्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की।
पूज्य स्वामी जी अपनी विदेश यात्रा पर हैं। आज अमेरिका से विदा लेते हुए उन्होंने कहा कि भारत ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ के दिव्य सूत्र को जीता है। यही भाव पूरे विश्व में जागे, विश्व आतंकवाद से मुक्त हो और अध्यात्मवाद की ओर बढ़े क्योंकि अध्यात्मवाद ही आतंकवाद से मुक्त होने का सबसे बड़ा उपाय है।

पूज्य स्वामी जी ने कहा कि विश्व में शान्ति बनी रहे, सर्वे भवन्तु सुखिनः, वसुधैव कुटुम्बकम्, ऊँ द्यौः शान्तिः के मंत्र गूंजे और शान्तिप्रिय वातावरण निर्मित हो।
उन्होंने कहा कि “वार इज़ नॉट द वे, टेरर इज़ नॉट द वे, पीस इज़ द वे। हेट इज़ नॉट द वे, वायलेंस इज़ नॉट द वे, ह्यूमैनिटी इज़ द वे, लव इज़ द वे। डिविज़न इज़ नॉट द वे, यूनिटी इज़ द वे। फियर इज़ नॉट द वे, फेथ इज़ द वे।
आज से 25 वर्ष पूर्व पूज्य स्वामी जी 17 देशों में ‘वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश लेकर यात्रा पर थे। जब 11 सितम्बर 2001 के आतंक की सूचना मिली, उन्होंने कहा कि उस समय हम जर्मनी में थे। वह समाचार पूरी मानवता के लिए एक गहरा आघात था।
आतंक के बाद जब ग्राउंड ज़ीरो को ग्राउंड हीरो के रूप में बनाने के लिए पूरा विश्व एकत्र हुआ, उस समय भी पूज्य स्वामी जी को न्यूयॉर्क की धरती पर भूमि-पूजन में सहभागी होने का अवसर मिला। उस अवसर पर हिन्दू धर्म की ओर से पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने प्रतिनिधित्व किया, न्यूयॉर्क के मेयर रूडी गूलियानी, मुस्लिम धर्म के लीडर, यहूदी धर्म के लीडर तथा क्रिश्चियन धर्म के प्रतिनिधि एक साथ उपस्थित थे। सभी का संकल्प था, ग्राउंड ज़ीरो को ग्राउंड हीरो बनाना, और विभाजन के बीच एकता, पीड़ा के बीच शान्ति तथा आतंक के बीच मानवता का संदेश देना।
आज, 25 वर्ष बाद, उसी धरती से पूज्य स्वामी जी ने पुनः दुनिया को विश्व शान्ति, अध्यात्मवाद, मानवता और एकता का संदेश दिया तथा समस्त विश्व के कल्याण की प्रार्थना की।
मानवता की स्मृति में उन सभी निर्दाेष आत्माओं को विनम्र श्रद्धांजलि। ईश्वर उनके परिवारों को शक्ति प्रदान करें और पूरे विश्व को शान्ति, सद्भाव और करुणा के मार्ग पर आगे बढ़ाएं।



