
देहरादून। भारतीय वानिकी अनुसन्धान एवं शिक्षा परिषद् में दिनांक 29 सितम्बर 2026 को हिंदी पखवाड़े का समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित किया गया। हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु भा.वा.अ.शि.प. में दिनांक 14 से 29सितम्बर 2026 तक हिन्दी पखवाड़े का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप अपनी गरिमामयी उपस्थिति से सभा का मान बढ़ाते हुए उप महानिदेशक (विस्तार) महोदय,डॉ. सुधीर कुमार ने परिषद में पखवाड़े के दौरान आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं में कार्मिकों कीभागीदारी की सराहना की तथा हिंदीतर भाषी कार्मिकों हेतु आयोजित सामान्य राजभाषा ज्ञान प्रतियोगिता का विशेष रूप से सराहा। उन्होने आशा व्यक्त किया राजभाषा के प्रचार-प्रसार हेतु सभी कार्मिक आगे भी इसी तरह से अपना योगदान देते रहेंगे।कार्यक्रम के दौरान सुर संगम कार्यक्रम भी आयोजित की गई जिसमें मुख्यालय के कार्मिकों तथा उनके कुछ परिजनों द्वारा नृत्य और गायन की प्रस्तुति दी गई।
इस वर्ष हिन्दी पखवाड़ा के दौरानआयोजित कुल 9 प्रतियोगिताएं यथा, टिप्पण एवं आलेखन,निबंध, अनुवाद,शब्द संधान (हिंदीतर भाषी),प्रश्नोत्तरी (क्विज),स्वरचित हिन्दी काव्यपाठ,हिंदी टंकण, श्रुतलेख (बहुकर्मी, वाहन चालक एवं समतुल्य),एवं अंत्याक्षरी प्रतियोगिता के पुरस्कार विजेताओं को नगद धनराशि एवं प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया गया। इसके अतिरिक्त वर्ष 2025-26 के दौरान अपने शासकीय कार्यों में राजभाषा क्रियान्वयन में समग्र प्रदर्शन हेतु भा.वा.अ.शि.प. मुख्यालय के 10 कार्मिकों एवं 02 संविदाकर्मियों को राजभाषा प्रोत्साहन पुरस्कार दिया गया।मुख्यालय के कार्यालयों की श्रेणी में वर्ष 2025-26के दौरान राजभाषा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले तीन कार्यालय तथा अधीनस्थ 9 संस्थानों में से ‘क’ क्षेत्र तथा ‘ग’ क्षेत्र स्थित 2 संस्थानों यथा उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर तथा काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, बेंगलुरू को राजभाषा शील्ड एवं प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया।
इस अवसर परश्री राजेश शर्मा, उपमहानिदेशक (प्रशासन),डॉ. एच. एस. गिनवाल,उपमहानिदेशक (अनुसंधान),डॉ. विनीत कुमार,उपमहानिदेशक (शिक्षा),डॉ. गीता जोशी, सहायक महानिदेशक (मीडिया एवं विस्तार), तथा भा.वा.अ.शि.प. मुख्यालय के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहें। श्री शंकर शर्मा, सहायक निदेशक (राजभाषा) के समग्र संचालन में आयोजित इस कार्यक्रम में श्रीमती अंबिका पराजुली और सुश्री अंबिका बुदियाल का विशेष सहयोग रहा।
