जसपुर। ऊधम सिंह नगर जनपद के जसपुर विकासखंड के कलियावाला गांव की रहने वाली अबीदा खातून, पत्नी सलमान खान, एक गरीब परिवार से हैं। परिवार के भरण-पोषण में सहयोग करने के लिए वह पहले से एक गाय पालकर अपनी आजीविका चला रही थीं। सीमित संसाधनों और कम आय के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, लेकिन अपने परिवार के बेहतर भविष्य के लिए अबीदा लगातार मेहनत कर रही थीं।
अबीदा “नई उम्मीद” स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं, जिसका गठन 25 अगस्त 2020 को हुआ था। यह समूह गुरुवाणी महिला ग्राम संगठन से जुड़ा है तथा हिमान्या महिला स्वायत्त सहकारिता, मेघावाला CLF से संबद्ध है। सामुदायिक संस्थाओं से जुड़ाव ने अबीदा को अपनी आजीविका को आगे बढ़ाने और एक बेहतर उद्यम स्थापित करने का अवसर प्रदान किया।
इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2025-26 में अबीदा का चयन IFAD-वित्तपोषित ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना के अंतर्गत कृषि आधारित व्यक्तिगत उद्यम के रूप में डेयरी (गाय पालन) गतिविधि के लिए किया गया। नवंबर 2025 में उन्होंने इस गतिविधि की शुरुआत की। परियोजना के अंतर्गत कुल ₹1,00,000 की वित्तीय व्यवस्था की गई, जिसमें ₹20,000 अबीदा का स्वयं का अंशदान, ₹30,000 ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना का सहयोग और ₹50,000 बैंक ऋण शामिल था। इस सहयोग ने अबीदा को अपनी मौजूदा आजीविका को विस्तार देने और डेयरी को एक व्यवस्थित आयवर्धक गतिविधि के रूप में विकसित करने का अवसर दिया।
परियोजना से प्राप्त सहयोग और वित्तीय संसाधनों का उपयोग करते हुए अबीदा ने 3 गायें खरीदीं और स्वयं डेयरी गतिविधि का संचालन शुरू किया। पहले जहां वह एक गाय के माध्यम से अपने परिवार के भरण-पोषण में सहयोग कर रही थीं, वहीं आज उनकी डेयरी गतिविधि का विस्तार हो चुका है। परियोजना शुरू होने के लगभग सात महीनों में इस उद्यम ने उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अबीदा ने इस गतिविधि से अब तक ₹1,08,600 की आय अर्जित की है। इस दौरान कुल ₹39,300 का व्यय हुआ और उन्हें ₹69,300 का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। वर्तमान में डेयरी गतिविधि से उन्हें औसतन ₹10,000 से ₹11,000 प्रतिमाह शुद्ध लाभ हो रहा है। साथ ही, प्राप्त ब्याज रहित ऋण की वापसी की दिशा में भी वह लगातार आगे बढ़ रही हैं और अब तक ₹28,000 की ऋण राशि वापस कर चुकी हैं।
अबीदा के लिए यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। जो महिला पहले एक गाय के सहारे अपने परिवार की आजीविका में सहयोग कर रही थीं, आज वह तीन गायों की डेयरी गतिविधि स्वयं संचालित कर रही हैं और नियमित रूप से आय अर्जित कर रही हैं। इससे उन्हें अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने में अधिक आत्मविश्वास मिला है और परिवार के लिए आर्थिक सुरक्षा का एक मजबूत आधार तैयार हुआ है।
“मेहनत करने की इच्छा हो और सही समय पर सहयोग मिल जाए, तो छोटी-सी शुरुआत भी बड़े बदलाव की वजह बन सकती है।” अबीदा खातून की कहानी इसी विश्वास को साकार करती है। ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना से मिली सहायता, बैंक ऋण और उनके स्वयं के निवेश ने उनकी पारंपरिक आजीविका को एक आयवर्धक उद्यम में बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज उनकी डेयरी गतिविधि उनके परिवार के लिए नियमित आय का स्रोत बन चुकी है और ग्रामीण महिला उद्यमिता एवं आत्मनिर्भरता की एक प्रेरक मिसाल प्रस्तुत कर रही है।
अबीदा की यह यात्रा बताती है कि आत्मनिर्भरता की शुरुआत हमेशा बड़े संसाधनों से नहीं, बल्कि एक छोटे कदम और सही अवसर से होती है। IFAD-वित्तपोषित ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना के सहयोग से उनकी मेहनत को दिशा और संसाधन मिले, जिसके परिणामस्वरूप एक साधारण ग्रामीण महिला आज अपने परिवार की आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। उनकी सफलता निश्चित रूप से गांव की अन्य महिलाओं को भी अपने कौशल और उपलब्ध अवसरों का उपयोग कर स्वरोजगार एवं उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करेगी।



