‘ जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’—मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में जनसेवा का ऐतिहासिक अभियान

देहरादून। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में संचालित ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम उत्तराखंड में सुशासन और संवेदनशील प्रशासन का प्रभावी मॉडल बनकर उभरा है। यह अभियान सरकार को सीधे जनता के द्वार तक पहुंचाने की कार्यशैली का जीवंत उदाहरण है, जिसके माध्यम से प्रदेशभर में रिकॉर्ड स्तर पर नागरिकों को लाभान्वित किया गया है।

आज तक की प्रगति के अनुसार, प्रदेश में कुल 670 कैंपों का आयोजन किया जा चुका है। इन कैंपों में अब तक 5,25,243 नागरिकों ने प्रतिभाग कर अपनी समस्याएं दर्ज कराई हैं तथा विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त किया है। केवल आज ही प्रदेशभर में 9 कैंपों का आयोजन किया गया, जिनमें 5,194 नागरिकों ने भाग लिया।

इस अभियान के अंतर्गत अब तक कुल 50,506 शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें से 33,461 शिकायतों का निस्तारण प्रभावी रूप से किया जा चुका है। यह आंकड़ा प्रशासन की त्वरित कार्यवाही और जवाबदेही को दर्शाता है।

इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्रों के लिए कुल 72,530 आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं, जिनका प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित किया जा रहा है। साथ ही अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से अब तक 2,91,580 नागरिकों को प्रत्यक्ष लाभ प्रदान किया जा चुका है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में यह अभियान इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश सरकार योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। विशेष रूप से दूरस्थ, पर्वतीय और सीमांत क्षेत्रों में लगाए गए कैंपों ने प्रशासन और जनता के बीच की दूरी को समाप्त किया है।

‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ कार्यक्रम ने यह सिद्ध किया है कि सुशासन केवल एक विचार नहीं, बल्कि धरातल पर लागू की जाने वाली प्रतिबद्धता है। शिकायतों के त्वरित निस्तारण, प्रमाण पत्रों की उपलब्धता, योजनाओं के प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण और जनसंवाद की खुली व्यवस्था ने प्रदेशवासियों का विश्वास और अधिक मजबूत किया है।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान निरंतर जारी रहेगा और प्रत्येक नागरिक तक शासन की पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का कोई भी व्यक्ति सरकारी योजनाओं से वंचित न रहे और हर पात्र नागरिक को उसका अधिकार समयबद्ध रूप से प्राप्त हो।

उत्तराखंड में सुशासन, पारदर्शिता और जनसेवा की दिशा में यह अभियान एक ऐतिहासिक उपलब्धि के रूप में स्थापित हो चुका है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश सरकार विकास और जनकल्याण के संकल्प को निरंतर नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रही है।

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