मजदूरी से उद्यमिता तक: उजमा और उनके परिवार की आत्मनिर्भरता की प्रेरक कहानी

बाजपुर। उत्तराखण्ड के ऊधम सिंह नगर जनपद के बाजपुर विकासखंड के बढ़ियावाला गांव की रहने वाली उजमा पत्नी इरशाद हुसैन एक गरीब ग्रामीण परिवार से हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित होने के कारण घर का भरण-पोषण मुख्य रूप से उनके पति इरशाद हुसैन द्वारा मजदूरी करके किया जाता था। मजदूरी का कार्य होने के कारण आय नियमित नहीं थी और परिवार की दैनिक जरूरतों को पूरा करना एक चुनौती बना रहता था।
परिवार की इस स्थिति को बदलने के लिए एक बेहतर और स्थायी आजीविका की तलाश थी। इसी दौरान आईफ़ैड -वित्तपोषित ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना ग्रामीण परिवारों के लिए उम्मीद की नई किरण बनकर सामने आई। परियोजना के अंतर्गत उजमा का सर्वेक्षण किया गया और उन्हें नान फार्म एंटरप्राइजेस के तहत बाइक रिपेयरिंग गतिविधि के लिए आवेदन करने का अवसर मिला। परियोजना के सहयोग से 23 अगस्त 2025 से इस गतिविधि की शुरुआत की गई।
बाइक रिपेयरिंग उद्यम की कुल लागत ₹1,50,000 रही, जिसमें ₹75,000 लाभार्थी अंश तथा ₹75,000 ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना से सहायता प्राप्त हुई। इस सहयोग से बाइक रिपेयरिंग से संबंधित आवश्यक सामान खरीदा गया और उजमा के पति इरशाद हुसैन ने मजदूरी के स्थान पर स्वयं का कार्य शुरू किया।
जहां पहले इरशाद हुसैन को परिवार की जरूरतें पूरी करने के लिए मजदूरी पर निर्भर रहना पड़ता था, वहीं आज वह बाइक रिपेयरिंग का अपना कार्य करके परिवार की आजीविका में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। अपने कार्य के माध्यम से वह प्रतिमाह लगभग ₹15,000 से ₹20,000 की बचत कर पा रहे हैं। इस बदलाव ने परिवार की आर्थिक स्थिति को पहले की तुलना में अधिक मजबूत बनाया है।
इस उद्यम से अब तक ₹1,20,000 की आय प्राप्त हुई है। गतिविधि में कुल ₹60,000 का व्यय हुआ तथा ₹60,000 का लाभ प्राप्त हुआ है। वर्तमान में परिवार को इस गतिविधि से प्रतिमाह लगभग ₹18,000 से ₹21,000 की आय/बचत हो रही है।
“कल तक मजदूरी ही परिवार की आजीविका का सहारा थी, आज अपने हुनर और उद्यम के माध्यम से परिवार आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।”
उजमा के परिवार के लिए यह बदलाव केवल आय में वृद्धि तक सीमित नहीं है। पहले अनिश्चित मजदूरी पर निर्भर रहने वाले परिवार को अब अपनी आजीविका का एक स्थायी साधन मिला है। बाइक रिपेयरिंग के कार्य ने इरशाद हुसैन को रोजगार के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं का काम करने और अपनी मेहनत का पूरा लाभ प्राप्त करने का अवसर दिया है।
यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि ग्रामीण परिवारों को यदि सही समय पर वित्तीय सहयोग और उद्यम स्थापित करने का अवसर मिले, तो वे अपनी परिस्थितियों को बदल सकते हैं। ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना की सहायता से उजमा के परिवार ने मजदूरी से उद्यमिता की ओर कदम बढ़ाया है और आज यह परिवार बेहतर एवं सम्मानजनक आजीविका की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उजमा और उनके पति इरशाद हुसैन की यह कहानी गांव के उन परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो आर्थिक चुनौतियों के बावजूद आगे बढ़ने का सपना देखते हैं। यह कहानी बताती है कि सही अवसर, सरकारी/परियोजना सहयोग और मेहनत के संकल्प से आजीविका के साधनों को बदला जा सकता है और आत्मनिर्भरता की नई राह बनाई जा सकती है।
ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना से मिला सहयोग उजमा के परिवार के लिए सिर्फ एक आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि मजदूरी से आत्मनिर्भर उद्यमिता की ओर बढ़ने का एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।

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