मेहनत से आत्मनिर्भरता तक: पुष्पा की डेयरी उद्यम की प्रेरणादायक कहानी

  • “जब मेहनत को सही अवसर और सहयोग मिला, तो पशुपालन बना आत्मनिर्भरता की नई राह।”

जसपुर। ऊधम सिंह नगर जिले के जसपुर विकासखण्ड के ग्राम पंचायत निवारमण्डी मेघावाला की रहने वाली पुष्पा, पत्नी श्री हेमराज सिंह, एक आर्थिक रूप से कमजोर ग्रामीण परिवार से आती हैं। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच पशुपालन उनके जीवन का हिस्सा रहा है। पहले वह गाय पालन के माध्यम से अपने परिवार के भरण-पोषण में सहयोग करती थीं, लेकिन सीमित संसाधनों और आर्थिक कठिनाइयों के कारण इस गतिविधि को बड़े स्तर पर ले जाना उनके लिए आसान नहीं था।
पुष्पा बाला जी समूह से जुड़ी हैं और सागर महिला ग्राम संगठन की सदस्य हैं। उनका संबंधित CLF हिमान्या महिला स्वायत्त सहकारिता है। वर्ष 2025-26 में उनकी आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से IFAD-वित्तपोषित Gramotthan (REAP) परियोजना के अंतर्गत उनका सर्वेक्षण किया गया। सर्वेक्षण के बाद उन्हें Farm Based Enterprises के अंतर्गत डेयरी गतिविधि के लिए सहयोग प्रदान किया गया। उनकी डेयरी गतिविधि की शुरुआत 06 अगस्त 2025 को हुई।


पुष्पा के डेयरी उद्यम के लिए कुल ₹3.00 लाख का निवेश किया गया। इसमें ₹75,000 स्वयं का अंशदान, ₹75,000 Gramotthan (REAP) परियोजना सहायता तथा ₹1.50 लाख बैंक ऋण शामिल है। इस वित्तीय सहयोग ने उन्हें अपने सीमित स्तर के पशुपालन को विस्तार देने और उसे एक व्यवस्थित आय-सृजन गतिविधि में बदलने का अवसर दिया।
परियोजना एवं बैंक से प्राप्त वित्तीय संसाधनों का उपयोग करते हुए पुष्पा ने 6 गायें खरीदीं। छह गायों के साथ शुरू हुई यह पहल उनके लिए केवल पशुओं की संख्या बढ़ाने का प्रयास नहीं थी, बल्कि अपने परिवार के लिए नियमित आय का मजबूत आधार तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
डेयरी गतिविधि को सफल और टिकाऊ बनाने में वित्तीय सहायता के साथ-साथ तकनीकी सहयोग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुष्पा को पशुपालन विभाग से तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ। पशुओं के बेहतर पोषण के लिए बिनौला संबंधी सहयोग एवं मार्गदर्शन दिया गया तथा पशुओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए टीकाकरण कराया गया। इस सहयोग से पुष्पा को पशुओं के पोषण, स्वास्थ्य और देखभाल को बेहतर तरीके से समझने तथा डेयरी गतिविधि को व्यवस्थित रूप से संचालित करने में मदद मिली।
इस प्रयास का असर उनकी आर्थिक स्थिति पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा। उपलब्ध परियोजना आंकड़ों के अनुसार, डेयरी गतिविधि से अब तक ₹2,05,000 की आय प्राप्त हुई है। इस दौरान लगभग ₹95,000 का व्यय हुआ और ₹1,50,000 का लाभ दर्ज किया गया है। वर्तमान में पुष्पा इस गतिविधि से लगभग ₹15,000 से ₹18,000 प्रतिमाह की बचत कर रही हैं। यह लगभग ₹1.80 लाख से ₹2.16 लाख प्रतिवर्ष की बचत क्षमता के बराबर है।
पुष्पा के लिए यह बदलाव केवल आय बढ़ने तक सीमित नहीं है। जो महिला पहले मुख्य रूप से गृहिणी थीं और गाय पालन के माध्यम से परिवार की आजीविका में सहयोग करती थीं, आज वही महिला अपने छह पशुओं के डेयरी उद्यम को स्वयं संचालित कर रही हैं। उनकी नियमित बचत परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है और उनके भीतर आत्मविश्वास तथा आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत कर रही है।
“आज पशुपालन मेरे लिए केवल परिवार चलाने का साधन नहीं, बल्कि मेरी अपनी पहचान और आत्मनिर्भरता का आधार बन गया है।”
पुष्पा की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि ग्रामीण महिलाओं में उद्यमिता की क्षमता पहले से मौजूद होती है। जरूरत होती है तो केवल सही अवसर, वित्तीय संसाधन और तकनीकी मार्गदर्शन की। IFAD-वित्तपोषित Gramotthan (REAP) परियोजना ने उनकी मौजूदा आजीविका गतिविधि को पहचानकर उसे उद्यम के रूप में विकसित करने का अवसर दिया। परियोजना सहायता के साथ बैंक ऋण ने उनके निवेश को मजबूत किया, जबकि पशुपालन विभाग के तकनीकी सहयोग ने डेयरी गतिविधि को बेहतर और व्यवस्थित तरीके से संचालित करने में मदद की।
इस पहल का प्रभाव केवल पुष्पा और उनके परिवार तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता, आर्थिक सशक्तिकरण और टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा देने का उदाहरण है। जब एक ग्रामीण महिला अपनी आय बढ़ाती है, तो उसका सकारात्मक प्रभाव परिवार की आर्थिक सुरक्षा, बच्चों के भविष्य और सामाजिक आत्मविश्वास पर भी पड़ता है।
निवारमण्डी की पुष्पा ने यह साबित किया है कि आत्मनिर्भरता की शुरुआत हमेशा बड़े उद्योग से नहीं होती। कभी-कभी इसकी शुरुआत गांव के एक छोटे से पशुपालन उद्यम से होती है, जिसे मेहनत, सही मार्गदर्शन और संस्थागत सहयोग धीरे-धीरे एक मजबूत आजीविका में बदल देता है।
₹75,000 के स्वयं के अंशदान, ₹75,000 की Gramotthan (REAP) परियोजना सहायता और ₹1.50 लाख के बैंक ऋण से तैयार ₹3 लाख के डेयरी उद्यम ने पुष्पा को छह गायों के साथ अपने जीवन को नई दिशा देने का अवसर दिया है। आज उनकी मेहनत उन्हें ₹15,000–₹18,000 प्रतिमाह की बचत तक पहुंचा रही है।
पुष्पा की यह यात्रा उन सभी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो अपने पारंपरिक कार्यों को एक सफल उद्यम में बदलने का सपना देखती हैं। उनकी कहानी हमें यह संदेश देती है कि यदि मेहनत के साथ अवसर, वित्तीय सहयोग और सही तकनीकी मार्गदर्शन मिल जाए, तो गांव की महिला न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती है, बल्कि स्वयं की एक मजबूत पहचान भी बना सकती है।
पुष्पा की सफलता केवल एक डेयरी उद्यम की सफलता नहीं, बल्कि ग्रामीण महिला के आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता की सफलता है—और यही Gramotthan (REAP) परियोजना की वास्तविक उपलब्धि है।

More From Author

रामचरितमानस, मानवता को मर्यादा, करुणा और ईश्वर से जोड़ने वाला जीवन-दर्शन है: स्वामी चिदानन्द सरस्वती

सौंग नदी पर बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए धनराशि स्वीकृत होने पर डांडी गांव क्षेत्रवासियों ने विधायक डॉ. प्रेमचंद का आभार जताया

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Comments

No comments to show.