- दीपावली, जीवन में सद्भाव, सेवा, संस्कार और सकारात्मक परिवर्तन का संकल्प है पर्व
- परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी एवं साध्वी भगवती सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में आध्यात्मिक साधना, सत्संग, योग, ध्यान एवं सेवा साधना का आयोजन
- पर्व हमारे विचारों को बदलते हैं, विचार हमारे व्यवहार को बदलते हैं और व्यवहार हमारे जीवन को बदलता है
- पर्व हमें जोड़ते हैं संस्कारों से, संस्कार हमें जोड़ते हैं अपने मूल से: स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में दीपावली का पावन महापर्व श्रद्धा, भक्ति, साधना, सेवा, संस्कार और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। दीपावली, स्वयं के भीतर झाँकने, जीवन को नई दिशा देने और अपने व्यवहार में सकारात्मक परिवर्तन लाने का अनुपम अवसर है। यह पर्व स्मरण कराता है कि जीवन की वास्तविक सुंदरता बाहरी वैभव में नहीं, बल्कि विचारों की पवित्रता, व्यवहार की मधुरता, हृदय की उदारता और कर्मों की श्रेष्ठता में निहित है।

परमार्थ निकेतन में दीपावली के पावन अवसर पर तीन दिवसीय ’डिस्कवरिंग द लाइट विदिन’ आध्यात्मिक रिट्रीट का आयोजन किया गया, जिसमें भारत सहित विश्व के अनेक देशों के प्रतिभागियों ने सहभाग किया।
इस आध्यात्मिक रिट्रीट के अंतर्गत योग, ध्यान, आयुर्वेद, नाद योग, आध्यात्मिक चिंतन और विभिन्न रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने भीतर विद्यमान शांति, प्रकाश और सकारात्मक ऊर्जा को पहचानने का अवसर प्राप्त हो रहा है। इस रिट्रीट का उद्देश्य कुछ दिन आध्यात्मिक वातावरण में बिताने के साथ ऐसे अनुभव और संस्कार प्राप्त करना है, जिन्हें प्रतिभागी अपने दैनिक जीवन, परिवार और समाज में भी आत्मसात कर सकें।

परमार्थ पीठाधीश्वर, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में प्रातःकाल पवित्र यज्ञ, मंत्रोच्चार एवं आध्यात्मिक साधनाओं के माध्यम से विश्व शांति, पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और सर्वकल्याण की मंगलकामना की। पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी के मार्गदर्शन में आयोजित दिव्य सत्संग के माध्यम से प्रतिभागियों को आत्मबोध, आंतरिक शांति, ध्यान, भारतीय संस्कृति और जीवन के शाश्वत मूल्यों से जुड़ने की प्रेरणा प्रदान की।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में पर्व जीवन को संस्कारित करने की सुंदर व्यवस्था हैं। प्रत्येक पर्व अपने साथ जीवन का सुन्दर संदेश लेकर आता है। धनतेरस हमें स्वास्थ्य, आरोग्य, समृद्धि और जीवन के प्रति कृतज्ञता का संदेश देता है। भगवान धन्वंतरि की आराधना हमें स्मरण कराती है कि आरोग्य ही सबसे बड़ा धन है। नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली) बाहरी और भीतरी स्वच्छता, नकारात्मकता के त्याग तथा जीवन से अज्ञान के अंधकार को दूर करने की प्रेरणा देती है। दीपावली माँ लक्ष्मी की आराधना, भगवान श्रीराम के अयोध्या आगमन की स्मृति और सत्य एवं धर्म की विजय का महापर्व है। यह हमें अपने अंतर्मन में ज्ञान, सद्बुद्धि, प्रेम और सद्भाव का दीप प्रज्ज्वलित करने का संदेश देती है। गोवर्धन पूजा प्रकृति, गौमाता, धरती और पर्यावरण के प्रति कृतज्ञता एवं संरक्षण का भाव जागृत करती है। वहीं भाई दूज भाई-बहन के पवित्र प्रेम, पारिवारिक आत्मीयता, विश्वास और संबंधों की मधुरता को समर्पित है।
इन पाँचों दिनों का संदेश जीवन के पाँच महत्वपूर्ण आयामों को स्पर्श करता है-आरोग्य, स्वच्छता, समृद्धि, प्रकृति संरक्षण और पारिवारिक प्रेम। यही दीपावली की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक पूर्णता है। इन पर्वों का वास्तविक उद्देश्य तभी पूर्ण होता है, जब इनके संदेश हमारे व्यवहार में उतरें।
आज आवश्यकता है कि हम अपने बच्चों और आने वाली पीढ़ियों को पर्वों का अर्थ केवल नए वस्त्र, मिठाइयाँ, आतिशबाजी और उपहारों तक सीमित न रखे, बल्कि उन्हें इन पर्वों से जुड़े संस्कारों, आदर्शों और जीवन मूल्यों से भी परिचित कराएँ। परिवार के साथ दीप प्रज्ज्वलित करना, बड़ों का आशीर्वाद लेना, छोटों को स्नेह देना, जरूरतमंदों के साथ खुशियाँ बाँटना, प्रकृति का सम्मान करना और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझना ही पर्वों की वास्तविक सार्थकता है।
पूज्य साध्वी भगवती सरस्वती जी ने कहा कि दीपावली का एक अत्यंत सुंदर संदेश है कि प्रकाश बाँटने से कभी कम नहीं होता। पर्वों का वास्तविक आनंद तभी है, जब हमारी खुशियों में दूसरों की मुस्कान भी शामिल हो। दीपावली पर एक दीप अपने घर के लिए और एक दीप किसी ऐसे घर के लिए जलाएँ, जहाँ अभाव के कारण उत्सव की रोशनी नहीं पहुँच पाती।
दीपावली के पावन अवसर पर श्रीसूक्तम् मंत्रोच्चार एवं माँ लक्ष्मी की आराधना, रंगोली सज्जा, दीप प्रज्ज्वलन, पवित्र हवन और माँ गंगा की दिव्य आरती आदि विशेष आयोजन किए जा रहे हैं। परमार्थ गुरुकुल के ऋषिकुमारों द्वारा भजन, कीर्तन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय संस्कृति की दिव्यता, परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत का संदेश प्रसारित किया जा रहा है।
आइए, इस दीपावली पर अपने घर के साथ अपने हृदय में भी दीप जलाएँ। एक दीप संस्कार का, एक दीप सेवा का, एक दीप सद्भाव का और एक दीप राष्ट्र एवं विश्व कल्याण का प्रज्ज्वलित करें।
