परमार्थ गंगा आरती में स्वर साम्राज्ञी आशा भोसले जी को अर्पित की भावपूर्ण श्रद्धांजलि

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन दिव्य गंगा आरती में भारत की स्वर साम्राज्ञी आशा भोसले जी को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि संगीत जगत के लिए आशा भोसले जी का जाना एक युग के अवसान के समान है, यह अत्यंत दुखद और अपूरणीय क्षति है। आशा जी की अनुपम आवाज़ ने पीढ़ियों तक भावनाओं को स्वर दिया, प्रेम की कोमलता, विरह की वेदना, भक्ति की गहराई और उत्सव की उल्लासपूर्ण ऊर्जा, सब कुछ उनके सुरों में जीवंत हो उठता था। उनका संगीत आत्मा को स्पर्श करने वाला दिव्य अनुभव था।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि “संगीत, आत्मा की भाषा है, और आशा जी की वाणी उसी दिव्यता का साक्षात् स्वरूप थी। उनके गीतों ने न केवल मनोरंजन किया, बल्कि जीवन के गहरे भावों को स्पर्श किया और मानवता को जोड़ने का कार्य किया। ऐसे महान कलाकार कभी विदा नहीं होते, वे अपने सुरों में सदैव जीवित रहते हैं।
स्वामी जी ने कहा कि जीवन क्षणभंगुर है, किन्तु सत्कर्म और सृजन अमर होते हैं। आशा जी अपने गीतों के माध्यम से सदैव हमारे बीच जीवित रहेंगी और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेंगी।
परमार्थ गंगा आरती के दौरान पूज्य संतों, ऋषिकुमारों, भक्तों एवं श्रद्धालुओं ने एक स्वर में उनकी स्मृति को नमन किया। सभी ने मौन रखकर आशा जी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और उनके अमूल्य योगदान को स्मरण किया।
ऊँ शांति।

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