- गंगा जी की आरती की दिव्यता व भव्यता के साथ स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने हेतु किया प्रेरित
- परमार्थ निकेतन गंगा जी के तट पर गंगा आरती कर गद्गद हुये पुरोहित
- हिन्दी साहित्य के महान उपन्यासकार और कथाकार श्री मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर उनकी साहित्स साधना को नमन
- शहीद बलिदानी श्री उधम सिंह जी के शहीदी दिवस पर परमार्थ निकेतन से भावपूर्ण श्रद्धाजंलि
- परमार्थ निकेतन, नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत अर्थ गंगा मॉडल के तहत संचालित 14 वीं गंगा जागरूकता एवं गंगा आरती प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन
- पाँच गंगा तटीय राज्यों के पुरोहितों ने पूज्य स्वामी जी के सान्निध्य में लिया स्वच्छ एवं अविरल गंगा का संकल्प, पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा गंगा की आरती तभी सार्थक, जब गंगा प्रदूषण मुक्त हो

ऋषिकेश। गंगा संरक्षण को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश द्वारा नमामि गंगे कार्यक्रम के अंतर्गत अर्थ गंगा मॉडल पर आयोजित 14वीं गंगा जागरूकता एवं गंगा आरती प्रशिक्षण कार्यशाला का प्रेरणादायी समापन हुआ। उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल सहित गंगा तट के पाँच राज्यों से आए पुरोहितों, आचार्यों और गंगा सेवकों ने परमार्थ पीठाधीश्वर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज से भेंट कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया तथा अपने-अपने क्षेत्रों में गंगा संरक्षण और स्वच्छता का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प लिया।

समापन अवसर पर पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि गंगा केवल भारत की सबसे बड़ी नदी ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था, सभ्यता और जीवनदर्शन की जीवनरेखा है। यदि गंगा स्वच्छ और अविरल रहेगी, तभी भारत की सांस्कृतिक चेतना भी अक्षुण्ण बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता ऐसे जननायकों की है जो समाज को गंगा संरक्षण के लिए प्रेरित करें।

उन्होंने कहा कि गंगाजी की आरती का वास्तविक अर्थ समाज के भीतर पर्यावरण चेतना का दीप जलाना है। यदि श्रद्धालु आरती के बाद घाटों पर प्लास्टिक, कूड़ा अथवा पूजन सामग्री छोड़ देते हैं, तो हमारी आस्था अधूरी रह जाती है। स्वच्छता, सेवा और संरक्षण के बिना पूजा पूर्ण नहीं हो सकती।
पूज्य स्वामी जी ने सभी पुरोहितों से आग्रह किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में प्रत्येक धार्मिक आयोजन को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ें तथा श्रद्धालुओं को प्लास्टिक मुक्त तीर्थ, स्वच्छ घाट, जल संरक्षण और प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व का संदेश दें। उन्होंने कहा कि पुरोहित समाज सामाजिक परिवर्तन का प्रभावशाली माध्यम है।

कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को गंगा आरती की पारंपरिक विधि, वैदिक मंत्रोच्चार, आध्यात्मिक अनुशासन, घाट प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, जल गुणवत्ता, अपशिष्ट प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण, जनभागीदारी तथा अर्थ गंगा की अवधारणा पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि गंगा संरक्षण समाज, संतों, युवाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों की सहभागिता से ही सफल हो सकता है।
समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों ने परमार्थ निकेतन के पावन गंगा तट पर आयोजित विश्वप्रसिद्ध गंगा आरती में सहभाग किया। अनेक पुरोहितों ने कहा कि परमार्थ निकेतन की गंगा आरती पर्यावरण संरक्षण और वैश्विक मानवीय मूल्यों का सशक्त संदेश है।
कार्यशाला में शामिल प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि परमार्थ निकेतन में प्राप्त प्रशिक्षण उन्हें अपने क्षेत्रों में गंगा संरक्षण के व्यापक जनजागरण अभियान चलाने की नई दिशा देगा। उन्होंने संकल्प लिया कि प्रत्येक गंगा आरती के साथ स्वच्छता अभियान, प्लास्टिक मुक्त घाट, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और जनसहभागिता को अनिवार्य रूप से जोड़ा जाएगा।
आज हिन्दी साहित्य के अमर कथाकार मुंशी प्रेमचन्द की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुये पूज्य स्वामी जी ने कहा कि प्रेमचन्द जी का साहित्य सामाजिक चेतना, मानवीय संवेदना और नैतिक मूल्यों का सशक्त दस्तावेज है, जो आज भी समाज को नई दिशा प्रदान करता है।
इसी अवसर पर महान क्रांतिकारी शहीद ऊधम सिंह के शहीदी दिवस पर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनके अद्वितीय साहस, राष्ट्रभक्ति और बलिदान को नमन करते हुये सभी ने राष्ट्रहित और सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति अपने संकल्प को दोहराया।
14वीं गंगा जागरूकता एवं गंगा आरती प्रशिक्षण कार्यशाला ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत में गंगा का भविष्य जागरूक समाज, संस्कारित पुरोहितों, पूज्य संतों के मार्गदर्शन, जनसहभागिता और सरकार के प्रयासों से ही सुरक्षित हो सकता है इसलिये इसी को गंगा जी का प्रहरी बनना होगा।
