परमार्थ निकेतन में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी का पावन सान्निध्य व आशीर्वाद

  • कथा व्यास पंडित श्री गुलशन जी महाराज के श्रीमुख से ज्ञान गंगा प्रवाहित
  • श्रीमद् भागवत कथा संस्कारों के दिव्य प्रवाह की अमर गाथा

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन की पावन दिव्य धरती पर आयोजित श्रीमद् भागवत कथा आध्यात्मिक चेतना, सनातन संस्कृति और भारतीय जीवन मूल्यों के अद्भुत संगम का दिव्य साक्षात्कार है। इस अलौकिक अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज का पावन सान्निध्य एवं दिव्य आशीर्वाद प्राप्त हुआ।
कथा व्यास पंडित श्री गुलशन जी महाराज के श्रीमुख से प्रवाहित ज्ञानगंगा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर किया। उनकी ओजस्वी, प्रभावशाली एवं संस्कारित वाणी ने श्रीमद् भागवत की अमर कथाओं को इस प्रकार जीवंत किया मानो स्वयं भगवान की लीला धरती पर साकार हो रही हो। उनकी प्रवाहमयी वाणी में संस्कारों की सुगंध, भक्ति का रस और वेदांत का गूढ़ ज्ञान समाहित है जिसनेे उपस्थित श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि श्रीमद् भागवत कथा जीवन जीने की कला है, परमात्मा से जोड़ने का सेतु है। उन्होंने कहा कि आज के युग में जब जीवन तनाव, असंतुलन और भौतिकता की दौड़ में उलझता जा रहा है, ऐसे में भागवत कथा हमें शांति, संतुलन और आत्मिक आनंद का मार्ग दिखाती है। यह कथा हमें संदेश देती है कि जीवन का वास्तविक उद्देश्य केवल भौतिक उपलब्धियाँ नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और ईश्वर से जुड़ाव है।

स्वामी जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा संस्कारों के दिव्य प्रवाह की अमर गाथा है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी मानवता को दिशा प्रदान करती आ रही है। इसमें वर्णित प्रत्येक प्रसंग, प्रत्येक चरित्र और प्रत्येक संदेश हमें जीवन के उच्च आदर्शों की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे अपनी जड़ों से जुड़ें, सनातन मूल्यों को अपनाएँ और अपने जीवन को उद्देश्यपूर्ण बनाएं।

कथा व्यास पंडित श्री गुलशन जी महाराज ने अपनी कथा में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्तों की भक्ति, और धर्म, ज्ञान तथा वैराग्य के महत्व को अत्यंत भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा जीवन का दर्पण है, जो हमें हमारे वास्तविक स्वरूप से परिचित कराता है। कथा के माध्यम से उन्होंने यह भी संदेश दिया कि जब तक मनुष्य अपने भीतर के अहंकार, द्वेष और मोह को त्याग नहीं करता, तब तक वह सच्चे आनंद और शांति को प्राप्त नहीं कर सकता।
उन्होंने कहा कि परमार्थ निकेतन की पवित्र भूमि पर पूज्य स्वामीजी के पावन सान्निध्य में कथा श्रवण करना एक अलौकिक अवसर है। कथा से प्राप्त शिक्षाओं को अपने जीवन में उतारें और अपने आचरण के माध्यम से समाज में प्रेम, करुणा और सद्भाव का प्रसार करें। उन्होंने कहा कि जब हम स्वयं में परिवर्तन लाते हंै, तभी समाज और राष्ट्र में वास्तविक परिवर्तन संभव होता है।
श्रीमद् भागवत कथा संस्कार, संस्कृति और चेतना के दिव्य संगम की एक प्रेरणादायक यात्रा है। मदान यजमान परिवार परमार्थ निकेतन के इस दिव्य वातावरण में श्रीमद् भागवत कथा का आनंद ले रहे हैं।

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