
हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज मुख्यालय की पांच दिवसीय प्रबंधन विकास कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का उद्घाटन शांतिकुज प्रतिनिधि श्री केदार प्रसाद दुबे तथा रेलवे के एडीजीएम श्री सुनील कुमार गुप्ता ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस कार्यक्रम में प्रयागराज मंडल, झांसी मंडल, आगरा मंडल एवं मुरादाबाद मंडल से आए रेलवे के कर्मचारी-अधिकारी प्रतिभाग कर रहे हैं। कार्यशाला का उद्देश्य रेल सेवाओं से जुड़े अधिकारियों के मानसिक तनाव को कम करना तथा आध्यात्मिक मूल्यों के माध्यम से उनकी कार्यक्षमता का विकास करना है।

शुभारंभ अवसर पर शांतिकुंज प्रतिनिधि श्री केदार प्रसाद दुबे ने कहा कि उपासना, साधना और आराधना का त्रिसूत्रीय सिद्धांत आधुनिक प्रबंधन का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक सफलता केवल विभागीय कार्यों के निस्तारण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आंतरिक संतुलन और आत्मनियंत्रण से भी जुड़ी होती है। उन्होंने युगऋषि पं. श्रीराम शर्मा आचार्य और स्वामी विवेकानंद के क्रांतिकारी विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि बाहरी दुनिया को नियंत्रित करने से पहले स्वयं को नियंत्रित करना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को गायत्री महामंत्र के जप और तप के वैज्ञानिक महत्व से अवगत कराया तथा गायत्री तीर्थ शांतिकुंज की दिव्य ऊर्जा से जुडऩे के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि गायत्री महामंत्र सद्विचारों और शक्ति का एक महान स्रोत है। नियमित अभ्यास से प्रतिभागी शांतिकुंज के पवित्र वातावरण की सकारात्मकता को आत्मसात कर सकते हैं, जिससे वे कार्यक्षेत्र में अधिक धैर्य, संतुलन और स्पष्टता के साथ निर्णय ले सकेंगे।
कार्यशाला के आयोजकों ने बताया कि पांच दिन तक चलने वाली इस कार्यशाला में सैद्धांतिक सत्रों के साथ-साथ योग, ध्यान और स्वाध्याय के माध्यम से रेलवे कर्मचारियों और अधिकारियों को मानसिक स्वास्थ्य तथा नैतिक नेतृत्व के गुण सिखाए जाएंगे। उत्तर मध्य रेलवे के एडीजीएम श्री सुनील कुमार गुप्ता ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे कार्य-जीवन संतुलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। शांतिकुंज प्रबंधन के अनुसार यह 140वां आयोजन है, जो इस बात का प्रमाण है कि कॉरपोरेट और सरकारी क्षेत्रों के लिए अध्यात्म आधारित प्रबंधन आज समय की प्रमुख आवश्यकता बन चुका है।
