सिलाई के हुनर से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ती सुनीता की कहानी

  • ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से हुनर बना परिवार की मजबूत आजीविका का आधार

जसपुर। ऊधम सिंह नगर जनपद के जसपुर विकासखंड के आमका गांव की रहने वाली सुनीता पत्नी सत्यवीर के पास सिलाई का हुनर तो था, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण इससे होने वाली आय परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। घर पर सिलाई का कार्य करने वाली सुनीता आर्थिक चुनौतियों के बीच परिवार के बेहतर भविष्य के लिए निरंतर प्रयास कर रही थीं।
सुनीता अक्शा समूह से जुड़ी हैं, जो मुस्कान ग्राम संगठन से संबद्ध तथा हिमान्या स्वायत्त सहकारिता, मेघावाला के अंतर्गत आता है। इसी जुड़ाव के माध्यम से उन्हें आईफैड-वित्तपोषित ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के अंतर्गत अपने कौशल को उद्यम में बदलने का अवसर मिला। सर्वेक्षण के बाद उनका चयन व्यक्तिगत नॉन-फार्म उद्यम पैकेज के तहत सिलाई गतिविधि के लिए किया गया। उन्होंने 16 अगस्त 2024 से इस कार्य को व्यवस्थित रूप से शुरू किया।
उद्यम की कुल लागत ₹1,00,000 रही। इसमें सुनीता का ₹20,000 स्वयं का अंश, ₹30,000 ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना सहायता और ₹50,000 बैंक ऋण शामिल था। परियोजना से मिले सहयोग ने उन्हें अपने कौशल को व्यवस्थित व्यवसाय में बदलने और नियमित आय अर्जित करने का अवसर दिया।
“हुनर पहले भी था, लेकिन सही सहयोग मिलने के बाद यही हुनर मेरे परिवार की आर्थिक मजबूती का आधार बन गया – सुनीता”
सुनीता की मेहनत का परिणाम उनके उद्यम के प्रदर्शन में स्पष्ट दिखाई देता है। पिछले 22 महीनों में सिलाई कार्य से ₹1,43,700 की कुल आय प्राप्त हुई, जबकि ₹38,155 का व्यय हुआ। इस प्रकार अब तक ₹1,05,545 का शुद्ध लाभ अर्जित किया जा चुका है। वर्तमान में सुनीता इस गतिविधि से औसतन ₹5,500 से ₹6,500 प्रतिमाह शुद्ध लाभ कमा रही हैं। साथ ही, उन्होंने ₹50,000 के ब्याज-मुक्त बैंक ऋण की पूरी राशि वापस कर दी है।
आज यह उद्यम सुनीता के परिवार की आजीविका को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सीमित आय से आगे बढ़ते हुए उन्होंने अपने कौशल को आर्थिक अवसर में बदला और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया। उनकी सफलता ग्रामीण महिलाओं के लिए यह संदेश देती है कि यदि हुनर को उचित अवसर, वित्तीय सहयोग और मेहनत का साथ मिले, तो छोटा-सा उद्यम भी परिवार की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव ला सकता है।
सुनीता की कहानी केवल एक सिलाई उद्यम की सफलता नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की कहानी है। ग्रामोत्थान (रीप) परियोजना के सहयोग से उनकी सिलाई मशीन आज उनके परिवार की आजीविका के साथ-साथ एक बेहतर भविष्य की उम्मीद भी बुन रही है।

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