विद्यार्थियों में संवेदनशीलता व सामाजिक उत्तरदायित्व के संस्कार करें विकसित : शैफाली पंड्या

  • शांतिकुंज में नवचेतना और प्रेरणा के साथ संपन्न हुआ दो दिवसीय शिक्षक गरिमा शिवि

हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित दो दिवसीय शिक्षक गरिमा शिविर का रविवार को समापन हो गया। इस शिविर में छत्तीसगढ़, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल तथा पूर्वोत्तर राज्यों से आए शिक्षक, शिक्षिकाएँ एवं भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा से जुड़े स्वयंसेवकों ने सहभागिता करते हुए शिक्षा को संस्कारों से जोडऩे तथा समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाने का संकल्प लिया।
वहीं प्रतिभागियों ने संस्था की अधिष्ठात्री श्रद्धेया शैलदीदी से भेंटकर आशीर्वाद एवं मार्गदर्शन लिया। श्रद्धेया शैलदीदी ने प्रतिभागियोंं को दिये अपने संदेश में कहा कि शिक्षक ज्ञान के संवाहक और भावी पीढ़ी के चरित्र निर्माता स्वरूप हैं। उन्होंने शिक्षकों से विद्यार्थियों के भीतर नैतिक मूल्यों, अनुशासन, संवेदनशीलता एवं राष्ट्रभक्ति के संस्कार विकसित करने के प्रेरित किया।


समापन सत्र को संबोधित करते हुए महिला मंडल की अध्यक्षा आदरणीया शैफाली पंड्या ने कहा कि शिक्षक और परिवार, दोनों ही समाज निर्माण की महत्वपूर्ण आधारशिलाएँ हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य ज्ञानार्जन ही नहीं होना चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व परिष्कार, चरित्र निर्माण एवं मानवीय मूल्यों के विकास पर भी विशेष बल दिया जाना चाहिए। उन्होंने गायत्री परिवार की संस्थापिका माता भगवती देवी शर्मा के जीवन एवं आदर्शों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज के विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण में महिलाओं की भूमिका सदैव महत्वपूर्ण रही है। परिवार, विद्यालय और समाज में सकारात्मक वातावरण के निर्माण में नारी शक्ति की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों के भीतर संवेदनशीलता, सदाचार, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा एवं सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे जीवन-मूल्यों का विकास करें।


शिविर के दौरान विभिन्न सत्रों में शिक्षा, संस्कार, व्यक्तित्व विकास, सामाजिक जागरूकता तथा राष्ट्र निर्माण से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए शिक्षा को अधिक प्रभावी, मूल्यनिष्ठ एवं समाजोपयोगी बनाने के संकल्प व्यक्त किए।
समापन अवसर पर चयनित प्रतिभागी शिक्षकों को प्रशस्ति प्रमाण-पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। इस दौरान छग, ओडिशा, झारखण्ड, पश्चिम बंगाल सहित पूर्वोत्तर राज्यों से आये शिक्षक, शिक्षिकाएं आदि उपस्थित रहे।

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