- “हौसले बुलंद हों तो अभाव भी अवसर बन जाते हैं। इच्छाशक्ति, मेहनत और सही सहयोग के साथ हर कठिन परिस्थिति को सफलता में बदला जा सकता है।”

ऊधम सिंह नगर। उत्तराखण्ड के जनपद ऊधम सिंह नगर के विकासखण्ड सितारगंज अंतर्गत ग्राम बैकुण्ठपुर (शक्तिफार्म) की निवासी श्रीमती गीता तरफदार, पत्नी श्री भूदर तरफदार, आज ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक पहचान बन चुकी हैं। 10 नवम्बर 2022 को जय हिन्द जय भारत स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने अपने जीवन को नई दिशा देने का संकल्प लिया। वे राधे-राधे महिला ग्राम संगठन तथा बढ़ते कदम क्लस्टर लेवल फेडरेशन (CLF) से जुड़ी हुई हैं।
गीता देवी का जीवन कभी आसान नहीं रहा। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर थी। उनके दिव्यांग पुत्र की देखभाल की जिम्मेदारी भी उन्हीं के कंधों पर थी। परिवार में आजीविका का कोई स्थायी साधन नहीं था और वे मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करती थीं। मजदूरी भी नियमित रूप से नहीं मिलती थी, जिसके कारण परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना अत्यंत कठिन हो जाता था। ऐसे कठिन समय में भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य का सपना संजोए रखा।
इसी दौरान IFAD-वित्तपोषित ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में उन्हें Ultra Poor Support Package के माध्यम से बकरी पालन गतिविधि के लिए चयनित किया गया। परियोजना के तहत उन्हें ₹35,000 की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई, जबकि उन्होंने स्वयं ₹11,100 का अंशदान किया। इस सहयोग ने उनके जीवन में नई उम्मीद जगाई और स्वरोजगार की दिशा में पहला मजबूत कदम साबित हुआ।
परियोजना से प्राप्त सहायता और अपनी बचत को मिलाकर गीता देवी ने 4 मादा बकरियों, 1 नर बकरे तथा 4–5 छोटे बकरी के बच्चों के साथ अपने बकरी पालन उद्यम की शुरुआत की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने इस कार्य को पूरी लगन, धैर्य और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ाया। आज उनके पास बकरियों एवं उनके बच्चों सहित लगभग 16 बकरियाँ हैं, जो उनकी मेहनत और उत्कृष्ट पशुपालन प्रबंधन का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
गीता देवी की सबसे बड़ी विशेषता उनका व्यवस्थित और वैज्ञानिक पशुपालन प्रबंधन है। उन्होंने बड़ी बकरियों के लिए अलग शेड, छोटे मेमनों के लिए अलग सुरक्षित शेड तथा चारे एवं फीडिंग की अलग व्यवस्था विकसित की है। पशुओं के रहने के स्थान की नियमित सफाई, स्वच्छता (Hygiene), पर्याप्त हवा और सुरक्षित वातावरण पर वे विशेष ध्यान देती हैं। उनके पशुपालन केंद्र को देखकर यह स्पष्ट महसूस होता है कि उन्होंने सीमित संसाधनों में भी एक आदर्श बकरी पालन इकाई विकसित की है।
सबसे प्रेरणादायक बात यह है कि गीता देवी निरक्षर (Illiterate) हैं, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और अनुभव से पशुपालन का ऐसा व्यावहारिक ज्ञान अर्जित किया है, जो किसी प्रशिक्षित पशुपालक से कम नहीं है। वर्षों तक अपनी बकरियों की देखभाल करते-करते उन्होंने पशुओं के पोषण, सामान्य बीमारियों की पहचान, समय पर उपचार, दवाइयों के उपयोग और टीकाकरण संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी स्वयं सीख ली। आज वे छोटी-मोटी बीमारियों का उपचार स्वयं कर लेती हैं तथा आवश्यकता पड़ने पर पशु चिकित्सकों से भी समय पर संपर्क करती हैं। उनका यह अनुभव इस बात का प्रमाण है कि सीखने की कोई उम्र या सीमा नहीं होती।
वर्तमान में उनके बकरी पालन उद्यम से ₹92,000 की आय प्राप्त हो चुकी है। व्यवसाय में केवल ₹14,300 का व्यय हुआ, जिससे उन्हें ₹77,700 का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ है। इसके अतिरिक्त वे ₹9,000 से ₹12,000 प्रति तिमाही की नियमित शुद्ध आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने Ultra Poor ऋण में से ₹17,500 की वापसी भी सफलतापूर्वक कर दी है, जो उनकी आर्थिक अनुशासन और व्यवसायिक सफलता को दर्शाता है।
आज गीता देवी अपने परिवार की मुख्य आजीविका का आधार बन चुकी हैं। अपने दिव्यांग पुत्र की देखभाल, परिवार की दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति और भविष्य की योजनाओं का दायित्व वे स्वयं निभा रही हैं। बकरी पालन से प्राप्त आय ने उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा प्रदान की है और उनका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ा दिया है। अब वे केवल अपने परिवार की मददगार नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।
गीता देवी की कहानी केवल एक सफल बकरी पालन उद्यम की कहानी नहीं है, बल्कि यह साहस, संघर्ष, मातृत्व और आत्मविश्वास की कहानी है। उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि यदि ग्रामीण महिलाओं को सही समय पर अवसर, वित्तीय सहायता और मार्गदर्शन मिले, तो वे सबसे कठिन परिस्थितियों को भी सफलता में बदल सकती हैं।
“IFAD-वित्तपोषित ग्रामोत्थान (REAP) परियोजना ने गीता देवी को केवल आर्थिक सहायता ही नहीं दी, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता का नया जीवन दिया। आज उनकी सफलता यह संदेश देती है कि शिक्षा की कमी कभी भी सफलता की बाधा नहीं बनती। दृढ़ इच्छाशक्ति, निरंतर सीखने की लगन और सही सहयोग से कोई भी महिला अपने परिवार और समाज के लिए परिवर्तन की मिसाल बन सकती है।”
