
हरिद्वार। निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज ने हरिद्वार में नीलधारा गंगा तट पर चंद्रग्रहण के अवसर पर विधिवत गंगा स्नान और पूजन किया। चंद्रग्रहण के अवसर पर निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज, स्वामी महामंडलेश्वर नर नारायण जी महाराज, पूज्य महामंडलेश्वर आदि योगी जी महाराज एवं साधको, सन्यासियों, ब्रह्मचारियो द्वारा शाम 6 बजे से 7 बजे एक घंटा नीलधारा के तट पर तप किया।


इस अवसर पर निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि जी महाराज ने कहा है कि भगवती का पावन द्वार मिल जाए तो निसंदेह उसे करोड़ गुना फल प्राप्त होता है। एक करोड़ फल एक माला जपने से प्राप्त होता है यह जो नील धारा का पावन तट है। इस तट पर लाखों वर्ष पहले भगवान शिव ने आकर यहां पर स्नान किया था। इससे सिद्ध होता है कि नील धारा पूरी दुनिया में 2552 किलोमीटर गंगा बहती है 2552 किलोमीटर गंगा में केवल 900 मीटर का जो तट है वह नील धारा का ही तट है। उन्होंने कहा है कि ग्रहण काल में, शुभ काल में, शुभ मुहूर्त में ऐसे पावन अवसर पर गंगा के तट पर जाकर जप, स्नान करते हैं वह अपने मन को अपनी आत्मा को शांति को भी प्राप्त करते हैं।
