परमार्थ निकेतन में आयोजित “कुबेर का खजाना” तीन दिवसीय आध्यात्मिक महोत्सव का समापन

  • परमार्थ निकेतन और परमार्थ सेवा समिति, मुम्बई के संयुक्त तत्वाधान में तीन दिवसीय हनुमान जन्मोत्सव कार्यक्रम का धूमधाम से समापन
  • पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी ने नारी रत्न श्रीमती राजेश्वरी जी मोदी को भगवान शिव की मूर्ति और रूद्राक्ष का पौधा भेंट कर किया अभिनन्दन
  • तीन दिनों तक हनुमान चालीसा और सुन्दरकांड के पाठ से गूंजा परमार्थ गंगा तट
  • पराक्रम, स्वाभिमान और अडिग साहस के प्रतीक, हिन्दवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटि-कोटि नमन एवं भावपूर्ण श्रद्धांजलि
  • जय भवानी! जय शिवाजी!
  • पराक्रम, स्वाभिमान और अदम्य साहस के प्रतीक, हिन्दवी स्वराज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज

ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन में आयोजित “कुबेर का खजाना” तीन दिवसीय आध्यात्मिक महोत्सव का समापन अत्यंत भव्य, भावपूर्ण और दिव्यता से ओत-प्रोत वातावरण में सम्पन्न हुआ। परमार्थ निकेतन एवं परमार्थ सेवा समिति, मुम्बई के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित तीन दिवसीय हनुमान जन्मोत्सव को विशेष श्रद्धा, उत्साह और भक्ति के साथ मनाया गया। तीनों दिन परमार्थ गंगा तट “जय श्री राम” और “हनुमान चालीसा” के मंत्रों से गूंज उठा।


पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी महाराज और डाॅ साध्वी भगवती सरस्वती जी के सान्निध्य में आयोजित इस महोत्सव में देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं ने सहभाग कर भक्ति, सेवा और संस्कार का अद्भुत संगम अनुभव किया। पूज्य स्वामी जी एवं साध्वी जी ने उन्हें भगवान शिव की दिव्य मूर्ति एवं रूद्राक्ष का पवित्र पौधा नारी रत्न श्रीमती राजेश्वरी जी मोदी को भेंट कर उनका अभिनन्दन किया।


तीन दिवसीय इस महोत्सव में प्रतिदिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दरकांड का सामूहिक पाठ हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं ने पूर्ण आस्था और समर्पण के साथ सहभागिता की। भक्ति की इस अखंड धारा ने सभी के हृदयों को जोड़ते हुए एकता, श्रद्धा और सकारात्मकता का संदेश दिया। गंगा तट पर सायंकालीन गंगा आरती के दौरान दीपों की ज्योति, मंत्रों की ध्वनि और भजनों की मधुरता ने वातावरण को अलौकिक बना दिया। ऐसा प्रतीत हुआ मानो स्वयं देवत्व धरती पर अवतरित हो गया हो।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा कि “हनुमान जी केवल शक्ति और पराक्रम के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे विनम्रता, सेवा और पूर्ण समर्पण के जीवंत आदर्श हैं। हमें उनके जीवन से प्रेरणा लेकर अपने भीतर की शक्ति को पहचानना और समाज के कल्याण में लगाना होगा।


इस पावन अवसर पर हिन्दवी स्वराज्य के संस्थापक, पराक्रम, स्वाभिमान और अदम्य साहस के प्रतीक छत्रपति शिवाजी महाराज की पुण्यतिथि पर पूज्य स्वामीजी ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।
उनके जीवन का स्मरण करते हुए कहा कि शिवाजी महाराज एक महान योद्धा के साथ धर्म, न्याय और सुशासन के अद्वितीय आदर्श थे। उनका जीवन संदेश देता है कि विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग रहकर राष्ट्र और समाज की सेवा कैसे की जाती है।
पूज्य स्वामी जी ने कहा कि “शिवाजी महाराज का जीवन हर भारतीय के लिए प्रेरणा है। उनका साहस, उनकी नीति, उनकी दूरदर्शिता और उनका राष्ट्रप्रेम आज भी हर युवा को जागृत करता है।
श्रीमती राजेश्वरी जी मोदी ने कहा कि परमार्थ निकेतन की यह पावन भूमि दिव्यता, साधना और सेवा का सजीव संगम है। गंगा तट पर स्थित यह धाम शांति और चेतना को जागृति प्रदान करता है। यहाँ ऋषि परंपरा की सुगंध, मंत्रों की ध्वनि और मानवता की सेवा का भाव हर कण में व्याप्त है। यह भूमि हमें सनातन मूल्यों, प्रकृति के प्रति सम्मान और आत्मिक उत्थान का संदेश देती है। यहाँ आने वाला प्रत्येक व्यक्ति भीतर से परिवर्तित होकर जाता है, मानो उसे अपने अस्तित्व का नया अर्थ मिल गया हो।
उन्होंने कहा कि परमार्थ निकेतन में बिताए ये तीन दिन उनके जीवन के अमूल्य क्षण बन गए हैं। उन्होंने कहा कि पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और साध्वी भगवती सरस्वती जी के सान्निध्य बिताये क्षण अद्भुत व अलौकिक हैं।

More From Author

व्यवसायिक एलपीजी सिलेण्डर वितरण के लिए नई एसओपी

शांतिकुंज साधकों का रक्तदान, जरूरतमंदों को मिलेगा जीवनदान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recent Comments

No comments to show.