
हरिद्वार। गायत्री तीर्थ शांतिकुंज चल रहे पाँच दिवसीय उत्तर मध्य रेलवे के 140वें प्रबंधन विकास कार्यक्रम का आज समापन हो गया। इसमें प्रयागराज, झांसी, आगरा, मुरादाबाद तथा दिल्ली मंडलों से आए रेलवे अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भागीदारी की। समापन से पूर्व रेलवे के अधिकारी, कर्मचारियों देवसंस्कृति विश्वविद्यालय का भ्रमण किया और शैक्षणिक गतिविधियों, शोध एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा विभिन्न नवाचारों का अध्ययन किया। साथ ही विश्वविद्यालय में संचालित व्यक्तित्व विकास, योग, भारतीय संस्कृति, जीवन प्रबंधन तथा सामाजिक जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों की भी जानकारी प्रदान की गई। अधिकारियों ने विश्वविद्यालय के शैक्षिक वातावरण, अनुशासन और मूल्यपरक शिक्षा प्रणाली की सराहना की। वहीं रेलवे अधिकारी, कर्मचारियों ने देव संस्कृति विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति डॉ चिन्मय पण्ड्या से भेंट की।

इस अवसर पर प्रतिकुलपति डॉ पण्ड्या ने कहा कि आज के समय में प्रबंधन और नेतृत्व क्षमता के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं का समन्वय अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि व्यक्तित्व विकास का वास्तविक उद्देश्य केवल प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना ही नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व की भावना को भी सुदृढ़ करना है। इस दौरान युवा आइकॉन डॉ चिन्मय पण्ड्या ने प्रतिभागियों को युग साहित्य, गायत्री महामंत्र लिखित चादर आदि भेंटकर सम्मानित किया।
इस अवसर को सुनील कुमार गुप्त (सहायक उप महाप्रबंधक, उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज), श्री शिवाजी कदम (मुख्य कारखाना प्रबंधक, उत्तर मध्य रेलवे, ग्वालियर), श्री चेतन तनेजा (वरिष्ठ मंडल परिचालन प्रबंधक, मुरादाबाद मंडल), श्री रवि कुमार मीना (सहायक कार्मिक अधिकारी, उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज मंडल), श्री पुष्पेंद्र सिंह (मुख्य कार्य अध्ययन निरीक्षक, उत्तर मध्य रेलवे, प्रयागराज) अधिकारियों ने अत्यंत ज्ञानवर्धक, प्रेरणादायी एवं व्यक्तित्व विकास के लिए उपयोगी बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम प्रबंधन कौशल, नेतृत्व क्षमता तथा सकारात्मक कार्य संस्कृति को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
