- शांति, सह-अस्तित्व और मानव बंधुत्व के वैश्विक प्रयासों में निभाएंगे महत्वपूर्ण दायित्व
हरिद्वार। दुनिया में जब अलग-अलग संस्कृतियों और समुदायों के बीच संवाद, सह-अस्तित्व और आपसी सम्मान की जरूरत लगातार महसूस की जा रही है, ऐसे समय में देवभूमि उत्तराखण्ड स्थित देव संस्कृति विश्वविद्यालय के उपाध्यक्ष डॉ. चिन्मय पंड्या को एक महत्वपूर्ण वैश्विक दायित्व मिला है। उन्हें बहरीन के प्रतिष्ठित किंग हमद अवार्ड फॉर को-एग्जिस्टेंस एंड टॉलरेंस की निर्णायक समिति के सदस्य के रूप में आमंत्रित किया गया है। बहरीन के महामहिम किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा की ओर से इस दायित्व के लिए डॉ. पंड्या के प्रति सम्मान और शुभकामनाएं व्यक्त की गईं।
उल्लेखनीय है कि बहरीन के राजा और इस पुरस्कार परिषद द्वारा वैश्विक स्तर पर चुनिंदा देशों के प्रतिष्ठित बुद्धिजीवियों, शीर्ष शिक्षाविदों और विभिन्न संस्कृतियों के प्रमुख विचारकों को इसमें शामिल किया गया है। जिसमें एकमात्र भारतीय प्रख्यात शिक्षाविद् एवं मोटिवेशनल स्पीकर डॉ चिन्मय पण्ड्या शामिल हैं।
यह पुरस्कार दुनिया में सह-अस्तित्व, पारस्परिक सम्मान, सहिष्णुता और मानव बंधुत्व की भावना को बढ़ावा देने वाले प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए समर्पित है। निर्णायक समिति का हिस्सा बनने के लिए डॉ. पंड्या का आमंत्रण अखिल विश्व गायत्री परिवार के उन वैश्विक प्रयासों से भी जुड़ता है, जिनके माध्यम से लंबे समय से मानव-एकता, सामाजिक समरसता, सद्भाव और विश्व कल्याण का संदेश दिया जा रहा है।
यह जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि यह मानवता को जोड़ने वाले मूल्यों के प्रति योगदान का अवसर है। यह दायित्व ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’, शांति, सद्भाव और विश्व कल्याण के उन शाश्वत मूल्यों से गहराई से जुड़ा है, जो संपूर्ण मानवता को एक परिवार के रूप में देखने की प्रेरणा देते हैं।” डॉ. पंड्या ने कहा कि आज दुनिया को केवल विकास की नहीं, बल्कि विश्वास, संवाद और मानवीय संवेदनाओं को मजबूत करने की भी जरूरत है। विभिन्न धर्मों, संस्कृतियों और विचारों के बीच सम्मानपूर्ण संवाद ही स्थायी शांति का आधार बन सकता है।



