मुर्गी पालन बना आय का सशक्त माध्यम, 520 किलो चिकन से ₹68 हजार की कमाई

चमोली। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में रीप के अंतर्गत संचालित सामुदायिक उद्यम नई सफलता की कहानियां गढ़ रहे हैं। विकासखंड पोखरी के अंतर्गत माँ चंडीका सीएलएफ से संबद्ध नानक डेरा स्वयं सहायता समूह, गिरसा द्वारा संचालित सीबीओ लेवल एंटरप्राइज (मुर्गी पालन इकाई) महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका संवर्धन का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरा है।

समूह की महिला सदस्य संगठित रूप से मुर्गी पालन का व्यवसाय संचालित कर स्थानीय बाजारों के साथ-साथ संस्थागत खरीदारों को भी गुणवत्तापूर्ण चिकन उपलब्ध करा रही हैं। समूह ने हाल ही में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) को 520 किलोग्राम चिकन की आपूर्ति कर लगभग ₹68 हजार की आमदनी अर्जित की।

इससे समूह की महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। मुर्गी पालन इकाई महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ-साथ उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ा रही है।

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