- धड़कते दिल के साथ की गयी सर्जरी को चिकित्सीय भाषा में ऑफ-पंप सर्जरी कहा जाता है जो बहुत ही जोखिम भरी होती है
- सर्जरी करने वाली डाॅक्टरों की टीम- ट्राॅमा सर्जन डॉ. नीरज कुमार के अलावा डॉ एकता, डॉ. रुशल और डॉ. गर्वित
- निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने सर्जरी करने वाली टीम के कार्यों की सराहना की
ऋषिकेश। नुकीली वस्तु से दिल में लगी गंभीर चोट (पेनिट्रेटिंग इंजरी) के मामले में एम्स ऋषिकेश के ट्राॅमा विशेषज्ञों की टीम ने एक जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। धड़कते दिल के साथ की गयी इस सर्जरी को चिकित्सीय भाषा में ऑफ-पंप सर्जरी कहा जाता है जो बहुत ही जोखिम भरी होती है।
बेहद चुनौती पूर्ण तरीके से की गयी यह सर्जरी संस्थान के ट्राॅमा विभाग द्वारा पिछले सप्ताह 27 अगस्त को की गयी थी। ट्राॅमा सर्जरी विभाग के हेड प्रो. एम. क्यू. आजम ने बताया कि पेनिट्रेटिंग कार्डियक इंजरी (दिल में गहरी चोट लगना) में समय का बहुत महत्व होता है और ऐसे मरीजों की जान बचाने में आपसी तालमेल व टीमवर्क एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि यह सफल परिणाम ट्रॉमा सर्जरी, एनेस्थीसिया, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन और नर्सिंग टीमों के बीच बेहतरीन समन्वय (कोऑर्डिनेशन) के कारण ही संभव हो सका है।
सर्जरी करने वाले ट्राॅमा सर्जन डाॅ. नीरज सिंह ने बताया कि श्यामुपर निवासी 21 वर्षीय अखिल सती को उनके पिता द्वारा 27 अगस्त 2026 को मध्य रात्रि के दौरान गंभीर अवस्था में ट्रॉमा इमरजेंसी में भर्ती करवाया गया था। उन्होंने बताया कि घायल युवक के दिल में किसी बहुत ही नुकीली वस्तु से गहरी चोट लगी थी और उसका बीपी लेवल बहुत कम हो गया था। दिल फट जाने से जीवन बचाने के लिए एक-एक मिनट का समय भारी पड़ रहा था। ऐसे में तत्काल सर्जरी करने का निर्णय लिया गया और घायल को इमरजेंसी लाइफ-सेविंग सर्जरी के लिए भेजा गया। डाॅ. नीरज ने बताया कि मरीज की हालत इतनी गंभीर थी कि यह सर्जरी हार्ट-लंग मशीन के बिना करनी पड़ी। उन्होंने बताया कि सर्जरी उपरांत छह दिनों के गहन इलाज और समर्पित देखभाल के बाद मरीज को 3 सितंबर को डिस्चार्ज कर दिया गया।
सर्जरी करने वाली डाॅक्टरों की टीम में ट्राॅमा सर्जन डॉ. नीरज कुमार के अलावा डॉ एकता, डॉ. रुशल और डॉ. गर्वित शामिल थे। जबकि एनेस्थीसिया टीम में डॉ. प्रवीण तलवार, डॉ. संदीप और डॉ. मिन्हाज का विशेष सहयोग रहा। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह ने सर्जरी करने वाली टीम के कार्यों की सराहना की है। उन्होंने इसे उपलब्धि पूर्ण कार्य बताया। ट्रॉमा सर्जरी विभाग के फैकल्टी डॉ. मधुर उनियाल ने कहा कि इस तरह की चोटों में जीवित रहने की दर (सर्वाइवल रेट) बहुत कम होती है। पिछले सात वर्षों से ट्रॉमा सर्जरी विभाग बहुत मजबूत हुआ है और विभाग इस तरह के दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण मामलों को संभालने में पूरी तरह सक्षम है। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड में ट्रॉमा के लिए इस तरह की यह पहली ऑफ-पंप कार्डियक सर्जरी है जो एम्स द्वारा सफलता पूर्वक संपन्न की गयी।



