प्रसिद्ध अभिनेता सुनील शेट्टी एवं उनकी धर्मपत्नी माना शेट्टी दर्शनार्थ आये परमार्थ निकेतन

  • पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के पावन सान्निध्य में दिव्य परमार्थ गंगा आरती में किया सहभाग
  • रूद्राक्ष का दिव्य पौधा, अंग वस्त्र भेंट कर किया अभिनन्दन
  • छोटी सोच समाधान को भी समस्या व बड़ी सोच समस्या को भी समाधान बना देती है
  • आधुनिकता को अपनाइए, पर अपनी आध्यात्मिकता को मत छोड़िए: स्वामी चिदानन्द सरस्वती

ऋषिकेश। पावन गंगा तट पर आयोजित दिव्य एवं भव्य परमार्थ गंगा आरती के पावन अवसर पर भारतीय फिल्म जगत के सुप्रसिद्ध अभिनेता श्री सुनील शेट्टी एवं उनकी धर्मपत्नी माना शेट्टी जी ने सहभाग कर माँ गंगा का आशीर्वाद प्राप्त किया।
परमार्थ गुरूकुल के आचार्यों व ऋषिकुमारों ने भारतीय संस्कृति के अनुरूप पुष्पमालाओं एवं वैदिक मंगल ध्वनियों से उनका स्वागत, अभिनन्दन किया।
परमार्थ निकेतन गंगा आरती के समय संपूर्ण वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो जाता है। वेदमंत्रों के उच्चारण, घंटियों की मधुर ध्वनि, दीपों की अलौकिक ज्योति तथा माँ गंगा के तट पर उमड़े श्रद्धालुओं की आस्था इस संध्या को और अविस्मरणीय बना देती है। श्री सुनील शेट्टी, उनकी धर्मपत्नी माना शेट्टी जी और उनके ईष्ट मित्रों ने श्रद्धाभाव से गंगा पूजन किया तथा राष्ट्र, समाज और समस्त मानवता के कल्याण, सुख-शांति एवं समृद्धि हेतु प्रार्थना की।


श्री सुनील शेट्टी ने कहा कि माँ गंगा भारत की आध्यात्मिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और जीवनदायिनी शक्ति का प्रतीक हैं। परमार्थ गंगा तट पर सम्मिलित होना उनके लिए अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरणादायक अनुभव है। उन्होंने भारतीय   संस्कृति, सनातन परंपराओं तथा प्रकृति संरक्षण के प्रति अपनी गहरी श्रद्धा व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि भारत की आध्यात्मिक परंपराएँ संपूर्ण विश्व को शांति, संतुलन और सह-अस्तित्व का संदेश देती हैं। गंगा आरती जैसे आयोजन न केवल आस्था को सुदृढ़ करते हैं, बल्कि समाज को अपनी जड़ों, मूल्यों और संस्कृति से जोड़ती है। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपनी सांस्कृतिक धरोहर, नैतिक मूल्यों एवं आध्यात्मिक परंपराओं को जानें, समझें और उन्हें आगे बढ़ाने में योगदान दें। गंगा तट पर अनुभव होने वाली शांति, ऊर्जा और सकारात्मकता अद्वितीय है। यह अंतर्मन को स्पर्श करने वाला अनुभव है।
पूज्य स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि माँ गंगा केवल जलधारा नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, चेतना, करुणा और आध्यात्मिक जीवन की अमृतधारा हैं।  जब समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तित्व सनातन मूल्यों, प्रकृति संरक्षण और आध्यात्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं, तब करोड़ों लोगों तक सकारात्मक संदेश पहुँचता है। जीवन की ऊँचाइयों पर पहुँचने के बाद भी अपनी जड़ों, अपनी     संस्कृति और अपनी आध्यात्मिक विरासत से जुड़े रहना जीवन की ऊँचाईयों को दर्शाता है।
स्वामी जी ने युवाओं का आह्वान करते हुये कहा कि आधुनिकता को अपनाइए, पर अपनी आध्यात्मिकता को मत छोड़िए। सफलता प्राप्त कीजिए, पर संस्कारों को साथ रखिए। प्रगति कीजिए, पर प्रकृति की रक्षा भी कीजिए।
आइए, हम सभी संकल्प लें, माँ गंगा की स्वच्छता, भारतीय संस्कृति की गरिमा, और मानवता की सेवा के लिए अपना योगदान देंगे, यही राष्ट्रधर्म है।

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